
New Delhi, 13 सितंबर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने ब्रिक्स सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा किए जाने का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जहां भी आम सहमति बनती है और उसे स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जाता है, India उसका स्वागत करेगा.
New Delhi में से बातचीत में सलमान खुर्शीद ने कहा कि India को आतंकवाद के कारण काफी दुख और पीड़ा झेलनी पड़ी है. ब्रिक्स सम्मेलन में ऐसे कई देश मौजूद थे, जिनके Pakistan के साथ भी करीबी संबंध हैं. इसके बावजूद पहलगाम हमले को लेकर आम सहमति बनना महत्वपूर्ण है. घोषणा में Pakistan का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पहलगाम हमले की निंदा की गई है. इस आम सहमति को आगे बढ़ाने के साथ-साथ ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि India को दोबारा आतंकवादी हमले का सामना न करना पड़े. यह सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और कब उठाए जाएंगे, इस पर अभी काम करने की जरूरत है.
ब्रिक्स के दिल्ली डिक्लेरेशन पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि इसमें कई ऐसे बिंदु हैं, जिन पर सहमति बनाना आसान नहीं रहा होगा. यह ध्यान रखना चाहिए कि घोषणा-पत्र पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के भी हस्ताक्षर हैं, जो अलग-अलग परिस्थितियों और संघर्षों से प्रभावित हैं.
इसके अलावा रूस और चीन भी इसके हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल हैं. घोषणा-पत्र में फिलिस्तीन और गाजा का भी उल्लेख किया गया है और इन मुद्दों पर आम सहमति बनना स्वागत योग्य है. कई विषय ऐसे रहे होंगे जिन पर सहमति बनाना आसान नहीं था, लेकिन घोषणा-पत्र में कुछ ऐसे संकेत दिखाई देते हैं, जिनसे यह पता चलता है कि आगे किस दिशा में बढ़ा जा सकता है.
डॉलर के विकल्प के सवाल पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि अभी ऐसा कोई स्पष्ट विकल्प सामने नहीं आया है, जिसे डॉलर का पूर्ण विकल्प माना जा सके. हालांकि कुछ मुद्दों पर नए तरह के समायोजन और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा जरूर हुई है. इनमें कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं. पुरानी वैश्विक व्यवस्था में बदलाव हो रहा है और अब सवाल यह है कि उसके स्थान पर कैसी व्यवस्था सामने आएगी. गुटनिरपेक्षता और निष्पक्षता की अवधारणा को नए प्रारूप में फिर से सामने लाया जाना चाहिए. ब्रिक्स सम्मेलन में इस दिशा में कुछ संकेत दिखाई दिए हैं और वह इसका स्वागत करते हैं.
चीनी President शी जिनपिंग के साथ पीएम मोदी की मुलाकात और ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवाल पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर सवाल उठाता रहा है, लेकिन उसे अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. न तो संसद के भीतर और न ही संसद के बाहर. उन्होंने आशंका जताई कि ब्रिक्स सम्मेलन में यह मुद्दा शायद सामने नहीं आया होगा. Government को विपक्ष को बताना चाहिए कि उसने सम्मेलन के दौरान कौन-सा मुद्दा उठाया और चीन की ओर से उस पर क्या प्रतिक्रिया मिली, ताकि यह जानकारी देश के साथ साझा की जा सके.
ब्रिक्स सम्मेलन से India को उपलब्धि मिलने के सवाल पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि केवल ब्रिक्स की अध्यक्षता करना अपने आप में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है. यह एक तय प्रक्रिया है, जिसके तहत सदस्य देशों को बारी-बारी से अध्यक्षता करने का अवसर मिलता है. इस साल India ने अध्यक्षता की है, इससे पहले ब्राजील ने की थी, और अगले साल चीन अध्यक्षता करेगा. इसलिए केवल अध्यक्षता मिलने को India की विशेष उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा. असली सवाल यह होना चाहिए कि India को जब अध्यक्षता करने का अवसर मिला, तब उसने क्या योगदान दिया, कितने महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति बनाने में भूमिका निभाई, और सम्मेलन के माध्यम से क्या हासिल किया.
मलेशियाई Prime Minister द्वारा जाकिर नाइक को लेकर India के साथ बातचीत के संबंध में दिए गए बयान पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि बातचीत हुई होगी, लेकिन उसके परिणाम सामने आने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है. हर देश के साथ बातचीत में India को अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि चीन के साथ बातचीत के दौरान India ने कौन-सी प्राथमिकताएं रखीं और उन बातचीत के बाद आगे क्या होगा, इस बारे में India Government को देश को जानकारी देनी चाहिए.
मलेशियाई Prime Minister की कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात पर सलमान खुर्शीद ने खुशी जताई. उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को भी इस तरह की महत्वपूर्ण बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए.
उन्होंने आरोप लगाया कि Government ने विपक्ष से पहले कोई परामर्श नहीं किया और यह भी नहीं बताया कि ब्रिक्स सम्मेलन में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा किन विषयों पर दबाव बनाया जाना चाहिए. Government को इस सम्मेलन के बाद विपक्षी नेताओं के साथ ब्रीफिंग करनी चाहिए. Government यदि विपक्ष को विश्वास में लिए बिना अपने स्तर पर ही काम करना चाहती है, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है.
उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर हुए विवाद पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि आपत्ति का कारण समझना जरूरी है. यह डॉक्यूमेंट्री कई जगहों पर दिखाई जा चुकी है. लोग डॉक्यूमेंट्री से सहमत या असहमत हो सकते हैं. जो लोग समर्थन करते हैं, वे अपना पक्ष रख सकते हैं और विरोध करने वाले भी अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. यह लोकतंत्र का हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि किसी संस्थान में स्क्रीनिंग को लेकर वहां की परिस्थितियां और व्यवस्था क्या है, इस पर फैसला संबंधित प्रबंधन पर छोड़ देना चाहिए. हर मुद्दे पर दूर बैठकर प्रतिक्रिया देते रहना उचित नहीं है.
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डीकेएम/
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