ब्रिक्स सम्मेलन में आतंकवाद पर बनी आम सहमति भारत के लिए बड़ी उपलब्धि: पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी

New Delhi, 13 सितंबर . New Delhi में ब्रिक्स देशों द्वारा पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने और New Delhi घोषणा पर सर्वसम्मति को पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है. वहीं पीएम मोदी के ग्लोबल साउथ को ‘रूल शेपर’ बनने के बयान का समर्थन जताया और कहा कि 190-195 देशों की आवाज सुनी जानी चाहिए.

ब्रिक्स देशों द्वारा पहलगाम आतंकी हमले की निंदा किए जाने पर पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने कहा, “अगर मैं कहूं कि यह सफलता पिछले एक साल में बनी है तो यह गलत नहीं होगा. पिछले साल तियानजिन, चीन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद और टेरर फंडिंग का जिक्र करने को लेकर विवाद हुआ था, जिस वजह से India ने घोषणा पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, क्योंकि इन मुद्दों को उसमें जगह नहीं मिली थी. इस साल बिश्केक में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन और उसके बाद यहां, आतंकवाद पर व्यापक चर्चा हुई.”

उन्होंने कहा कि लगभग सात से आठ पैराग्राफ में आतंकवाद, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के रूपों को संबोधित किया गया और जम्मू-कश्मीर और India में हुए आतंकवादी हमलों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया.

पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने Prime Minister Narendra Modi के ‘ग्लोबल साउथ को रूल टेकर से रूल शेपर बनना चाहिए’ वाले बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग 190-195 देश ग्लोबल साउथ में आते हैं, ऐसे में इन देशों की आवाज सुनी जानी चाहिए. ग्लोबल साउथ को दुनिया के नियम तय करने का हक मिलना चाहिए, न कि सिर्फ सात जी7 देशों के पास ही यह अधिकार होना चाहिए.

ब्रिक्स देशों द्वारा सर्वसम्मति से New Delhi घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने को लेकर पूर्व राजदूत ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अलग-अलग देशों ने अपने-अपने राष्ट्रीय हित होने के बावजूद और कुछ मामलों में एक-दूसरे से मतभेद होने के बावजूद हिस्सा लिया, जैसे India और चीन, सऊदी अरब और ईरान और यूएई और ईरान.

उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद, न केवल एक घोषणा जारी की गई, बल्कि कई देशों को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर आम सहमति भी बनी. यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. हालांकि, अब यह देखना बाकी है कि इसका कार्यान्वयन, या इस पर आगे ठोस कार्रवाई कैसे होती है.