
New Delhi, 27 अक्टूबर . राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने Tuesday को एक खास मुलाकात का अनुभव साझा किया है. उन्होंने बताया कि संसद भवन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान उन्हें महान लेखक लियो टॉलस्टॉय के प्रपौत्र प्योत्र टॉलस्टॉय से मिलने का सौभाग्य मिला.
राघव चड्ढा ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘वॉर एंड पीस’ और ‘अन्ना कारेनिना’ जैसी कालजयी कृतियों के रचयिता लियो टॉलस्टॉय न केवल एक महान लेखक और दार्शनिक थे, बल्कि वे एक असाधारण व्यक्तित्व के धनी भी थे. एक कुलीन परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने समाज में मौजूद विशेषाधिकारों और असमानता पर सवाल उठाए. युद्ध की विभीषिका को करीब से देखने वाले एक सैनिक के रूप में, वे शांति, अहिंसा, करुणा और सत्य के प्रबल समर्थक बन गए.”
राघव चड्ढा ने बताया, “हम भारतीयों के लिए उनकी विरासत इसलिए भी विशेष है, क्योंकि महात्मा गांधी के साथ उनका गहरा बौद्धिक और आध्यात्मिक जुड़ाव था. वर्ष 1909 में टॉलस्टॉय और गांधीजी के बीच सत्य, प्रेम और अहिंसा के विषयों पर पत्रों का आदान-प्रदान शुरू हुआ. टॉलस्टॉय के विचारों ने गांधीजी के सिद्धांतों को गहराई से प्रभावित किया, जो बाद में India के स्वतंत्रता संग्राम में एक सशक्त माध्यम बने. गांधीजी ने उनके सम्मान में दक्षिण अफ्रीका में अपने आश्रम का नाम भी ‘टॉलस्टॉय फार्म’ रखा था.”
राघव चड्ढा ने लिखा, “एक सदी से भी अधिक समय बाद India की संसद में उनके वंशज से मिलना, जो स्वयं एक प्रतिष्ठित सांसद हैं, एक अत्यंत विशेष क्षण था. यह इस बात का एक सुंदर उदाहरण है कि भले ही देश भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से दूर हों, लेकिन महान विचारों की कोई सीमा नहीं होती. टॉलस्टॉय के रूस और हमारे India के बीच का यह बौद्धिक जुड़ाव, हमारे दोनों महान राष्ट्रों की मित्रता का एक ऐसा अध्याय है जो हमेशा जीवंत रहेगा.”
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एससीएच/
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