ब्रिक्स बैठक में मोदी का संदेश, आपसी हित और सम्मान से आगे बढ़ें भारत-चीन

New Delhi, 15 सितंबर . विदेश मंत्रालय ने Tuesday को कहा कि हाल ही में New Delhi में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर Prime Minister Narendra Modi और चीनी President शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई.

New Delhi में Tuesday को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीएम मोदी ने बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया कि India और चीन को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए.

जब बैठक को लेकर चीनी पक्ष के बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें कहा गया था कि ताइवान और तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर India की नीति और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और वह अपनी धरती पर किसी भी ताकत को चीन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं देगा, तो जायसवाल ने जवाब दिया, “चर्चा के दौरान कई मुद्दे सामने आए, और हमने आपको उनसे अवगत कराया है, जिनमें आपके सवाल में उल्लिखित मुद्दे भी शामिल हैं. Prime Minister ने भारतीय चिंताओं का भी जिक्र किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और तीन आपसी सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए.”

पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने 12 सितंबर को New Delhi में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक की, जहां दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि “मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए” और इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए.

बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, “दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर प्रगति का स्वागत किया. उन्होंने पुष्टि की कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए. मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए. Prime Minister ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों पक्षों को तीन आपसी सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित से निर्देशित होना चाहिए.”

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए एक आवश्यक आधार बनी हुई है.

विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया, “उन्होंने दोनों पक्षों की ओर से सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया. दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के Political परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों के आधार पर सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की.”

दोनों नेताओं ने लोगों के बीच आपसी संबंधों में हुई प्रगति पर भी गौर किया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और अधिक आवाजाही को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया.

बयान में आगे कहा गया, “आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर, उन्होंने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों सहित एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने और सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.”

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार का विस्तार करना जारी रखना चाहिए और चुनौतियों से निPatna चाहिए. इस बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.