ब्रिक्स देशों के संसदीय नेताओं की मेजबानी, सीपी राधाकृष्णन ने भारतीय लोकतंत्र की विरासत की सराहना की

नई दिल्‍ली, 27 अक्‍टूबर . राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने Tuesday को New Delhi स्थित भारतीय संसद में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग ले रहे ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं के लिए दोपहर भोज का आयोजन किया.

इस कार्यक्रम में Lok Sabha के अध्यक्ष ओम बिरला; ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों की संसदों के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी; Union Minister; राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश; राज्यसभा एवं Lok Sabha के महासचिवों के साथ-साथ ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे.

राज्यसभा के सभापति ने विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों का भारतीय संसद में स्वागत करते हुए कहा कि वे एक ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर एकत्रित हुए हैं, जो India के संसदीय लोकतंत्र का केंद्रबिंदु है. India का संसदीय लोकतंत्र समय के साथ जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक विकसित हुआ है.

उन्होंने कहा कि India के लिए लोकतंत्र कोई नई अवधारणा नहीं है. इतिहास इस बात का साक्षी है कि उत्तर में वैशाली जैसे स्थानों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था विद्यमान थी, जबकि दक्षिण India में चोल शासकों ने “कुडावोलाई” प्रणाली अपनाई थी. लोकतंत्र की इसी गहरी ऐतिहासिक विरासत के कारण India को सही मायने में लोकतंत्र की जननी कहा जाता है.

ब्रिक्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि यह समूह वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है. उन्होंने ब्रिक्स को एक ऐसे समूह के रूप में वर्णित किया, जहां विविध संस्कृतियां, समृद्ध इतिहास और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाएं एक संतुलित, समावेशी एवं समृद्ध विश्व व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होती हैं.

उन्होंने कहा कि 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श और चर्चाएं वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सदस्य एवं साझेदार देशों के सामूहिक संकल्प को दर्शाती हैं. यह संकल्प एकजुटता, संवाद और आपसी विश्वास के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की साझा प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त करता है.

सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान व्यक्त किए गए दृष्टिकोण का स्मरण करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि India के Prime Minister Narendra Modi ने इस बात को रेखांकित किया था कि ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं. राधाकृष्णन ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि 12वां ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन इन प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा तथा सदस्य एवं साझेदार देशों में विकसित हो रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा.

राज्यसभा के सभापति ने कहा कि भारतीय परंपरा में अतिथियों के लिए दोपहर भोज का आयोजन करना केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आत्मीयता और आपसी सम्मान की सच्ची अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा कि साथ बैठकर भोजन करने से नेताओं को नीतियों और शासन से आगे बढ़कर आपसी मानवीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिलता है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल आधार हैं.

इस अवसर पर आशा व्यक्त करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि यह दोपहर भोज सभी प्रतिनिधियों को अनौपचारिक रूप से विचारों के आदान-प्रदान और आपसी संबंधों को और गहरा बनाने का सुखद अवसर प्रदान करेगा.

उन्होंने कामना की कि भारतीय व्यंजनों की सोंधी सुगंध, भारतीय आतिथ्य की आत्मीयता और दोपहर का यह सुहावना समय सभी विशिष्ट अतिथियों के मन में एक अमिट छाप छोड़ेगी.

राज्यसभा के सभापति ने कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कामना की कि India में बिताए गए समय तथा इस सम्मेलन के दौरान पुनः प्रगाढ़ हुए और नए बने मैत्री संबंधों की स्मृतियाँ सभी के लिए सुखद एवं अविस्मरणीय रहें. उन्होंने सभी अतिथियों को भोज का आनंद लेने के लिए आमंत्रित किया और दीर्घकालिक मैत्री संबंधों की कामना के साथ अपने संबोधन का समापन किया.

–

एएसएच/डीकेपी