‘बुद्धिमानों के वचनों पर चिंतन कर कर्म करने वाला पाता है दीर्घकालिक सफलता’, पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

New Delhi, 30 अक्टूबर . Prime Minister Narendra Modi की ओर से Monday को social media पर एक सुभाषित शेयर किया गया है, जिसमें यश, सम्मान प्राप्त करने और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देने का संदेश दिया गया है.

पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “सुव्याहृतानि धीराणां फलतः परिचिन्त्य यः. अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥” शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जो व्यक्ति धीर, बुद्धिमान और विवेकी जनों के सुविचारित वचनों के परिणाम पर विचार करके उनके अनुसार अपने कार्यों में दृढ़तापूर्वक प्रयत्न करता है, वह दीर्घकाल तक यश और सम्मान प्राप्त करता है तथा राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान प्रदान करता है.

Prime Minister की ओर से साझा किया गया यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक सनातन धर्म के प्रसिद्ध महाकाव्य महाIndia के उद्योग पर्व के अंतर्गत आने वाली ‘विदुर नीति’ के 39वें अध्याय के 31वें श्लोक से लिया गया है. महाIndia युद्ध से ठीक पहले पांडवों के अधिकारों को लेकर महाराजा धृतराष्ट्र चिंतित थे, तब महात्मा विदुर ने इस श्लोक के माध्यम से उन्हें समझाया था.

इस श्लोक के माध्यम से विदुर राजा धृतराष्ट्र को समझाते हैं कि एक श्रेष्ठ और बुद्धिमान राजा या मनुष्य को अपने कर्मों का निर्धारण किस प्रकार करना चाहिए. उन्होंने बताया कि केवल ज्ञान की बातें सुनना काफी नहीं है. असली सफलता और चिरस्थायी सम्मान उसे मिलता है जो ज्ञानी लोगों की सीख को समझता है, उस सीख के अच्छे-बुरे दूरगामी परिणामों का आकलन करता है और फिर संकल्प लेकर अपने कर्तव्य-पथ पर आगे बढ़ जाता है.

इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले अपने से अधिक अनुभवी और ज्ञानी लोगों की सलाह लेनी चाहिए. केवल जोश में आकर काम शुरू नहीं करना चाहिए, बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि भविष्य में इसके क्या परिणाम होंगे. बिना सोचे-समझे किए गए काम से क्षणिक लाभ तो हो सकता है, लेकिन योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्य से मिलने वाला सम्मान हमेशा टिका रहता है.

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एसडी/एएस