
Patna, 6 अक्टूबर . जन सुराज के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए शिक्षकों और ग्रेजुएट मतदाताओं से जन सुराज के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान की अपील की. उन्होंने कहा कि बिहार के शिक्षक और ग्रेजुएट राज्य के सबसे शिक्षित मतदाताओं में हैं और वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था, सम्मान, वेतनमान और रोजगार के अवसरों के लिए बदलाव चाहते हैं.
प्रशांत किशोर ने से बातचीत में कहा कि बिहार में बदलाव की जो शुरुआत बांकीपुर से हुई है, वह रुकने वाली नहीं है. लोग सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली Government को स्वीकार नहीं करेंगे और शिक्षक समेत पढ़ा-लिखा मतदाता बिहार में बदलाव और बेहतरीन के लिए मतदान करेगा. उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने लिए सम्मान, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और सातवां वेतनमान चाहते हैं. शिक्षक केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने साथियों और आने वाली पीढ़ी के लिए भी बेहतर व्यवस्था चाहते हैं और जन सुराज इन अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करेगा.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बैठक को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि नितिन नवीन ने कितनी बैठकें कीं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें लोगों ने कितना समर्थन दिया. जब नितिन नवीन को लोगों ने वोट नहीं दिया तो शिक्षक उन्हें क्यों महत्व देंगे. जन सुराज शिक्षकों के लिए सातवें वेतनमान की व्यवस्था करने और बिहार के स्नातक बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में काम करेगा.
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे खुद को बिहार के सबसे शिक्षित और प्रबुद्ध मतदाताओं में शामिल मानते हुए सभी पहलुओं का आकलन करें और इसके बाद जन सुराज के दोनों उम्मीदवारों को अपना समर्थन दें. उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों ने अपना संकल्प और कार्यक्रम लोगों के सामने रखा है और जीतने के बाद वे उसी के आधार पर काम करेंगे.
इस दौरान प्रशांत किशोर ने शिक्षकों से कहा कि वे चाहे किसी भी श्रेणी में हों, विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय शिक्षक, नियोजित शिक्षक, वित्त रहित शिक्षक या प्रधानाचार्य, उनकी मांगों को लेकर जन सुराज आवाज उठाएगा. उन्होंने दावा किया कि Lok Sabha चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की जिम्मेदारी वह उठाएंगे. इसके लिए जरूरत पड़ने पर धरना, आमरण अनशन और Chief Minister का घेराव तक किया जाएगा. उन्होंने शिक्षकों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अगर Government शिक्षकों की मांग नहीं मानती है तो आगामी Lok Sabha चुनाव में इसका Political असर पड़ेगा.
प्रशांत किशोर ने कहा कि इन उम्मीदवारों की जीत केवल दो व्यक्तियों की जीत नहीं होगी, बल्कि इससे भाजपा, एनडीए और सत्तारूढ़ व्यवस्था को यह संदेश जाएगा कि बिहार के शिक्षक नया विकल्प और नया रास्ता तलाश रहे हैं. अगर Government ने शिक्षकों की बात नहीं मानी तो Lok Sabha चुनाव में उसके सामने Political चुनौती खड़ी हो सकती है. सातवें वेतनमान और वित्त रहित शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए Government पर दबाव बनाने का यही रास्ता है.
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