बिस्मिल्लाह खान के पैतृक मकान पर विरोधियों के आरोपों को परिवार ने बताया गलत, बोले-उस्ताद का कमरा बनेगा म्यूजियम

वाराणसी, 7 नवंबर . India रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के परिवार के सदस्यों ने उनके पैतृक मकान को तोड़े जाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि करीब 100 साल पुराना जर्जर ढांचा उनकी सहमति और जरूरी अनुमतियों के साथ फिर से बनाया जा रहा है जबकि जिस कमरे में शहनाई के उस्ताद रहते थे, उसे संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया जाएगा.

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के परपोते ने विरोधियों के आरोपों पर कहा, “ऐसा कुछ नहीं है. कोई जबरदस्ती नहीं हुई है. यह सब गलत बातें फैलाई जा रही हैं. हमने देखा है कि लोग बढ़-चढ़कर पोस्ट कर रहे हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है. यह पारिवारिक मामला है. पूरा परिवार मिलकर इसका निर्माण करा रहा है. किसी को कोई आपत्ति नहीं है. प्रशासन से हमें हर तरह की अनुमति मिली हुई है. प्रशासन की निगरानी में यह निर्माण कार्य हो रहा है और सारे आरोप गलत हैं. प्रशासन की ओर से कोई जबरदस्ती नहीं की गई है.”

म्यूजियम के निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि अभी एक कमरा बनाया जाएगा, जिसमें उनसे जुड़ी सारी चीजें रखी जाएंगी. उनके उपयोग की वस्तुएं, तस्वीरें और अन्य स्मृतियां वहां सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि दूर-दूर से आने वाले पर्यटक उन्हें देख सकें. उसे पूरी तरह व्यवस्थित रखा जाएगा. अभी इसका पूरा स्वरूप तय नहीं हुआ है. काम शुरू हुआ है और धीरे-धीरे आगे की जानकारी सामने आएगी.

विरोधियों के आरोपों पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पोते मोहम्मद सिब्तैन ने कहा, “Government कोई जबरदस्ती नहीं कर रही है. यह मकान काफी जर्जर हालत में था. कभी भी कोई हादसा हो सकता था. इसलिए परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर इसके पुनर्निर्माण का फैसला किया है. किसी को कोई आपत्ति नहीं है. प्रशासन की अनुमति के साथ यह कार्य किया जा रहा है.”

उन्होंने कहा कि Police की तरफ से भी कोई जबरदस्ती नहीं है. यह मकान लगभग 1920 के आसपास का बना हुआ है और काफी पुराना हो चुका है. इसलिए इसका पुनर्निर्माण किया जा रहा है. Government की तरफ से इसक अनुमति मिल चुकी है.

मोहम्मद सिब्तैन ने कहा कि उस्ताद की स्मृति में एक स्मारक और संग्रहालय बनाया जाएगा. साथ ही रहने की व्यवस्था भी होगी. Government का कोई दबाव नहीं है. यह हमारा अपना निर्णय है. अपनी श्रद्धा और स्मृति के रूप में हम इसे संग्रहालय के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, ताकि उनकी याद हमेशा बनी रहे और आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें याद रख सकें.

उन्होंने कहा कि पूरे घर को म्यूजियम नहीं बनाया जा रहा है. उनका जो कमरा था, वह बहुत ज्यादा जर्जर हालत में था. इसलिए उसका पुनर्निर्माण कराया जा रहा है, ताकि उनकी स्मृति सुरक्षित रहे और भविष्य में कोई दिक्कत न हो.

विरोधियों के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह से गलत बातें हैं. इससे हमें कोई दिक्कत नहीं है. हमारे साथ पूरा प्रशासन है और सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हैं. यह कोई बहुत बड़ा प्रोजेक्ट नहीं है. कुछ लोग इसे बेवजह मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि ऐसी कोई बात नहीं है.

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