बाल झड़ने से लेकर कमजोर हड्डियों तक, हर समस्या का हल है पृथ्वी मुद्रा

New Delhi, 1 नवंबर . हमारे शरीर का निर्माण पंचमहाभूतों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से हुआ है. जब इन तत्वों में असंतुलन आ जाता है, तो शरीर में कई तरह की बीमारियां और कमजोरियां आने लगती हैं. योग में मुद्राओं को इन तत्वों को संतुलित करना का सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना गया है. इन्हीं मुद्राओं में से एक है, पृथ्वी मुद्रा.

पृथ्वी मुद्रा शरीर में पृथ्वी तत्व को संतुलित करने और स्थिरता प्रदान करने वाली एक प्रमुख हस्त मुद्रा है.

आयुष मंत्रालय के अनुसार, ‘पृथ्वी मुद्रा’ शरीर में पृथ्वी तत्व को संतुलित करने और आध्यात्मिक व शारीरिक आरोग्यता को बढ़ावा देने वाली एक बेहद प्रभावशाली हस्त मुद्रा है. आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है, जिसमें अनामिका उंगली पृथ्वी तत्व को और अंगूठा अग्नि तत्व को दर्शाता है. दरअसल, जब हम अनामिका उंगली के अग्रभाग से मिलाते हैं, तो पृथ्वी तत्व सक्रिय हो जाता है. यह तत्व मूलाधार चक्र की ऊर्जा को जगाता है, जो रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है.

मूलाधार चक्र असंतुलित होने पर मन में डर, बेचैनी और अस्थिरता बनी रहती है. पृथ्वी मुद्रा से इस चक्र में स्थिरता आती है. पृथ्वी का गुण ही स्थिरता और धैर्य है, इसलिए यह मुद्रा मन की भाग-दौड़ को कम करके उसे वर्तमान में टिकने में मदद करती है और मन शांत होने लगता है.

हमारी त्वचा शरीर के सबसे बाहरी ठोस आवरण हैं. जब पृथ्वी संतुलित होता है, तो त्वचा के टिश्यूज को सही पोषण मिलता है. यह मुद्रा शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और रक्त संचार को बेहतर करने में मदद करती है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है, रूखापन दूर होता है और त्वचा स्वस्थ दिखती है. साथ ही, यह कमजोर पाचन वाले और दुबलेपन से परेशान लोगों के शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाकर वजन को स्वस्थ रूप से संतुलित करने में सहायक माना गया है.

जिन लोगों के शरीर में कफ दोष की अधिकता है या जिन्हें सर्दी-खांसी/अस्थमा की गंभीर समस्या है, उन्हें इसका निरंतर अभ्यास करने से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए.

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एनएस/पीएम