
New Delhi, 5 नवंबर . Pakistan में बार-बार मुद्रा का अवमूल्यन होने के बावजूद निर्यात और आर्थिक प्रदर्शन में कोई स्थायी सुधार नहीं आया है, क्योंकि देश की गहरी संरचनात्मक समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं. एक रिपोर्ट में ये बात कही गई है.
‘द फ्राइडे टाइम्स’ (Pakistan की साप्ताहिक समाचार पत्र) के एक विश्लेषण में तर्क दिया गया है कि केवल विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में बदलाव करने से अर्थव्यवस्था की बुनियादी कमजोरियां दूर नहीं हो सकतीं.
इसमें Pakistan की अर्थव्यवस्था को एक ऐसे वाहन के रूप में बताया गया है, जिसका प्रदर्शन चार मुख्य स्तंभों, व्यापक आर्थिक स्थिरता, विदेशी मुद्रा का प्रवाह, शासन और आर्थिक स्वतंत्रता, तथा उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर निर्भर करता है.
लगातार राजकोषीय घाटा, उच्च मुद्रास्फीति, Government द्वारा अत्यधिक कर्ज लेना, और कमजोर कर संग्रह ने आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाया है और रुपए पर लगातार दबाव बनाए रखा है.
साथ ही, निर्यात, निवेश और विदेशी मुद्रा जुटाने में कमजोरियों ने उस फायदे को सीमित कर दिया है, जो आमतौर पर कमजोर मुद्रा से मिलने की उम्मीद की जाती है.
रिपोर्ट के अनुसार, आयातित ईंधन, मशीनरी और औद्योगिक कच्चे माल पर देश की निर्भरता निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा के अवमूल्यन के असर को कम कर देती है.
हालांकि, कमजोर मुद्रा निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है, लेकिन यह आयातित कच्चे माल को महंगा करके उत्पादन लागत भी बढ़ा देती है, जिससे मिलने वाला संभावित फायदा काफी हद तक खत्म हो जाता है.
रिपोर्ट में शासन से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है, जिनमें विनियामक बाधाएं, भ्रष्टाचार, कमजोर संस्थान, नौकरशाही की देरी और अनिश्चित कारोबारी माहौल शामिल हैं. ये चीजें निवेश को हतोत्साहित करती हैं और आर्थिक दक्षता को कम करती हैं.
इसमें आगे कहा गया है कि उत्पादकता का कम होना एक और बड़ी बाधा है.
शिक्षा, तकनीक को अपनाने, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा की उपलब्धता और औद्योगिक दक्षता में कमियों ने Pakistan की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर कर दिया है. इससे विनिमय दर में बदलाव के बावजूद व्यवसायों के लिए अपने निर्यात का विस्तार करना मुश्किल हो गया है.
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि बार-बार मुद्रा का अवमूल्यन करने से अक्सर उच्च मुद्रास्फीति पैदा होती है, विदेशी कर्ज चुकाने की लागत बढ़ती है और लोगों की क्रय शक्ति घटती है. आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था में इसका सबसे बुरा असर कम आय वाले वर्गों पर पड़ता है.
Pakistan एक ऐसे चक्र में फंस सकता है, जहां कमजोर उत्पादकता और खराब शासन व्यवस्था बाहरी असंतुलन पैदा करते हैं. इससे मुद्रा का अवमूल्यन, मुद्रास्फीति और धीमी आर्थिक वृद्धि होती है, और अंततः मुद्रा पर फिर से दबाव बनने लगता है.
‘द फ्राइडे टाइम्स’ के अनुसार, “इसलिए, रुपए की मजबूती एक बेहतर आर्थिक प्रबंधन का परिणाम होनी चाहिए, न कि मनमाने नियंत्रणों के जरिए हासिल किया जाने वाला कोई लक्ष्य.”
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एससीएच/डीकेपी
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