बाराबंकी में बाढ़ और कटान का संकट गहराया, कई मकान सरयू नदी में समाए

बाराबंकी, 10 सितंबर . नेपाल से लगातार छोड़े जा रहे पानी के चलते उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ गया है. इस वजह से बाराबंकी में बाढ़ और कटान का संकट लगातार गहराता जा रहा है. नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.

ग्रामीणों के मुताबिक रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव में लगातार जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बने घर पानी में गिर जा रहे हैं. मिट्टी कटान होने से नदी का पानी घरों के नजदीक पहुंच रहा है. वहीं रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के सैकड़ों गांव प्रभावित हैं.

उन्होंने बताया कि अब 10 से 12 मकान सरयू नदी में गिर चुके हैं. एक के बाद एक पक्के मकानों के नदी की गिरने से ग्रामीणों में दहशत है. हालात ऐसे हैं कि लोगों ने अपने घरों को बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी है. मजबूरी में ग्रामीण खुद ही पक्के मकानों को तोड़कर ईंट, दरवाजे, खिड़कियां, टीन शेड और गृहस्थी का जरूरी सामान निकाल रहे हैं.

कटान के बारे में श्यामू बताते हैं कि वह मंदिर के पास छोटी सी मिठाई की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. उनके परिवार में आठ लोग हैं. घर और रोजी-रोटी दोनों पर संकट आ गया है. नदी का कटान बढ़ने से उनका घर सुरक्षित नहीं है और परिवार को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. कब नदी उनके घर के पास आ जाए पता नहीं है.

वहीं राजू का आरोप है कि कटान को समय रहते रोका जा सकता था. उनका कहना है कि अगर बड़े पत्थर डालकर मजबूत बचाव कार्य कराया जाता तो शायद उनका मकान बच जाता. राजू के मुताबिक अधिकारी मौके पर आते रहे, लेकिन प्रभावी इंतजाम नहीं हो सके. उनका कहना है कि फिलहाल प्रशासन की तरफ से दो वक्त का खाना मिल रहा है, लेकिन घर और भविष्य की चिंता बनी हुई है.

ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि हर साल बाढ़ आती है और कटान रोकने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी बाढ़ के समय अपनी जिंदगी और गृहस्थी बचाने के लिए उन्हें खुद ही क्यों जूझना पड़ता है?