
रांची, 31 अगस्त . Jharkhand विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व Chief Minister बाबूलाल मरांडी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य के संथाल परगना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, तीव्र जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलाव और भूमि पर अवैध कब्जे पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने केंद्र Government के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच अभियान चलाने, अवैध घुसपैठियों को चिन्हित कर डिटेंशन सेंटर में रखने और उनके तत्काल निर्वासन की मांग की है.
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में वर्ष 2019 से 2024 के बीच के आधिकारिक मतदाता आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकुड़, राजमहल, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, बरहेट, नाला और दुमका समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में एक विशेष वर्ग के मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है.
पत्र के अनुसार, पाकुड़ में इस वर्ग के मतदाताओं की दर में 40.9 प्रतिशत, लिट्टीपाड़ा में 35.5 प्रतिशत, नाला और बरहेट में 40.3 प्रतिशत तथा दुमका में 33.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो अन्य वर्ग के मतदाताओं की वृद्धि दर से काफी अधिक है. मरांडी ने आरोप लगाया है कि संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम का खुला उल्लंघन करते हुए सरकारी जमीन, गोचर भूमि और स्थानीय आदिवासियों की पैतृक भूमि पर सुनियोजित तरीके से कब्जे किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि फर्जी वंशावली, जाली पहचान पत्र और अवैध जन्म प्रमाण पत्र बनाकर इन घुसपैठियों को बसाया जा रहा है. पत्र में दावा किया गया है कि राज्य के सत्तारूढ़ दल और स्थानीय प्रशासन के एक वर्ग द्वारा वोट बैंक की राजनीति के तहत इन तत्वों को Political संरक्षण दिया जा रहा है.
संथाल परगना की जनजातीय अस्मिता और सीमा सुरक्षा का हवाला देते हुए मरांडी ने गृह मंत्री से केंद्र Government के पर्यवेक्षण में 2003-2004 के पुराने खतियान व भू-अभिलेखों के आधार पर वंशावली का तकनीकी सत्यापन कर अवैध नागरिकों की पहचान के लिए विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने संथाल परगना प्रमंडल में तत्काल एक सुसज्जित डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का अनुरोध किया है, ताकि चिन्हित किए गए अवैध घुसपैठियों को हिरासत में रखकर उनके निर्वासन की प्रक्रिया पूरी की जा सके.
नेता प्रतिपक्ष ने निर्वाचन आयोग के माध्यम से मतदाता सूचियों की स्क्रूटनी कराकर जाली दस्तावेजों के आधार पर जोड़े गए फर्जी नामों को हटाने और जाली दस्तावेज बनाने वाले रैकेट तथा उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील भी की है.
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एसएनसी/डीकेपी
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