बांग्लादेश के साथ पुराने एन्क्लेव से दिल्ली में एसआईआर विरोध तक, भाजपा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने लगाए साजिश के आरोप

हैदराबाद, 17 अक्टूबर . तेलंगाना से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित ऐतिहासिक एन्क्लेव (छिटमहल) के मुद्दे को दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा से जुड़ी पुरानी विसंगतियों के कारण अवैध प्रवासन को बढ़ावा मिला, जिसका असर आज भी मतदाता सूचियों पर पड़ रहा है.

social media पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में रेड्डी ने 2015 से पहले India और बांग्लादेश के बीच मौजूद सीमा व्यवस्था को दुनिया की सबसे जटिल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक बताया.

उन्होंने कहा कि India के 111 एन्क्लेव बांग्लादेश के भीतर थे, जबकि बांग्लादेश के 51 एन्क्लेव India के भीतर स्थित थे. कुछ स्थानों पर स्थिति और भी जटिल थी, जहां एक देश का क्षेत्र दूसरे देश के भीतर स्थित क्षेत्र के अंदर मौजूद था. विभाजन के दौर से चली आ रही इन विसंगतियों के कारण कई दशकों तक वहां रहने वाले लोगों को प्रशासनिक सेवाओं, पहचान दस्तावेजों और नागरिकता से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ा.

रेड्डी के अनुसार, Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व वाली Government के कार्यकाल में संसद से पारित 2015 के भूमि सीमा समझौते (लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट) के जरिए इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान किया गया.

उन्होंने कहा कि समझौते के तहत क्षेत्रीय अदला-बदली की गई और निवासियों को नागरिकता चुनने का विकल्प दिया गया. इसके साथ ही दोनों देशों की सीमाओं के भीतर मौजूद दूसरे देश के भूभागों की व्यवस्था समाप्त हुई.

रेड्डी ने कहा, “ऐसी मूर्खतापूर्ण सीमाएं Political हितों के लिए बनाई गई थीं. ये विभाजन के समय से लेकर हाल तक, यानी 2015 तक जारी रहीं, जब Narendra Modi Government आई.”

BJP MP ने भारत-बांग्लादेश सीमा के ऐतिहासिक मुद्दे को दिल्ली में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़ते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण अवैध और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करने के लिए जरूरी है.

एसआईआर के आलोचकों का दावा है कि इस प्रक्रिया के तहत 13 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं. वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी गलत तरीके से हटाए गए हैं. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है.

रेड्डी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को नागरिकता और सीमा प्रबंधन से जुड़ी पुरानी समस्याओं को दूर करने की दिशा में एक जरूरी कदम के रूप में पेश किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में Political संरक्षण के कारण अवैध प्रवासन जारी रहा और इसका इस्तेमाल वोट बैंक की राजनीति के लिए किया गया.

उन्होंने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और असम सहित अन्य क्षेत्रों में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कथित अवैध प्रवासन का प्रभाव हैदराबाद, दिल्ली, बिहार और Odisha तक महसूस किया जा रहा है.

रेड्डी ने अपने आरोपों को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि हाल के विरोध प्रदर्शन और डिजिटल अभियान Prime Minister Narendra Modi की Government को हटाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा हैं.

उन्होंने कांग्रेस, Samajwadi Party, द्रमुक और कुछ अन्य संगठनों सहित विभिन्न विपक्षी दलों और समूहों पर एक साझा उद्देश्य से काम करने का आरोप लगाया.

रेड्डी ने कहा, “उनके (विपक्ष के) पास कोई साझा मुद्दा नहीं है. साझा मुद्दा न तो नीट है, न यूपीआई भुगतान प्रणाली और न ही चुनाव आयोग. साझा उद्देश्य Prime Minister मोदी को हराना और सत्ता परिवर्तन करना है.”

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नेतृत्व परिवर्तन चुनाव के माध्यम से होना चाहिए, न कि कथित तौर पर संगठित सड़क प्रदर्शनों के जरिए.

BJP MP ने social media पर फॉलोअर्स की संख्या में कथित हेरफेर का भी आरोप लगाया. आम आदमी पार्टी से जुड़े एक स्वतंत्र Political व्यक्ति का जिक्र करते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स की अचानक बढ़ोतरी को “100 प्रतिशत फर्जी और 100 प्रतिशत भुगतान करके हासिल किया गया” बताया.

उन्होंने ऑनलाइन लोकप्रियता के इन आंकड़ों की तुलना विरोध प्रदर्शनों के शुरुआती चरण में सड़कों पर दिखाई देने वाली कथित कम संख्या से की.

रेड्डी ने India की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करने वाले संभावित बाहरी दबावों को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने मुद्रा में उतार-चढ़ाव, तेल व्यापार में व्यवधान और सूचना प्रौद्योगिकी तथा दवा उद्योग पर संभावित प्रभावों का उल्लेख किया.

उनके अनुसार, Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में India इन चुनौतियों के बावजूद अपनी रणनीतिक और आर्थिक स्वायत्तता बनाए रखने में सफल रहा है.

भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते ने दोनों देशों के बीच छिटमहलों की दशकों पुरानी समस्या का समाधान किया था. हालांकि, अवैध प्रवासन, नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों और मतदाता सूची की शुद्धता के मुद्दे अब भी Political बहस का हिस्सा बने हुए हैं.

दिल्ली में एसआईआर को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच रेड्डी ने पुराने सीमा विवाद को मौजूदा बहस से जोड़ते हुए इसे मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की व्यापक प्रक्रिया के रूप में पेश किया है. जहां भाजपा समर्थक इसे अवैध और अपात्र नामों को हटाने का जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं विरोध करने वाले इसे पात्र नागरिकों के मताधिकार पर असर डालने वाली प्रक्रिया करार दे रहे हैं.

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डीएससी