बांग्लादेशी वोटरों के समर्थन में चुनाव आयोग के खिलाफ देश को गुमराह कर रहे राहुल गांधीः निशिकांत दुबे

New Delhi, 2 अक्टूबर . देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर हो रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर हमला बोला है. भाजपा नेता नेता ने Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है.

निशिकांत दुबे ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पुराने दस्तावेज को साझा करते हुए कहा, “1983 में असम में नेल्ली नरसंहार हुआ जिसमें एक रात में लगभग 5000 बांग्लादेशी मुसलमान मारे गए, हजारों घायल और लापता हुए, जिनकी लाश तक नहीं मिली. तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त शकधर चिल्लाते रहे कि 1980 Lok Sabha चुनाव के बाद बिना एसआईआर के असम में Lok Sabha व विधानसभा चुनाव नहीं करा सकते. India में चुनाव India के मतदाताओं से होगा, बांग्लादेशी या Pakistanी वोटर से नहीं लेकिन इंदिरा गांधी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर जबरदस्ती 1983 का चुनाव करवाया, नतीजा दंगे. वर्षों तक असम जलता रहा. आज राहुल गांधी उसी बांग्लादेशी वोटरों के समर्थन में चुनाव आयोग के खिलाफ देश को गुमराह कर गृह युद्ध कराना चाहते हैं.”

इसके पहले 1 अक्टूबर को निशिकांत दुबे ने एक्स पोस्ट पर एसआईआर को लेकर जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा था.

निशिकांत दुबे ने एक्स पर पोस्ट किया, “1 अक्टूबर 1952: चीन ने पहली बार हमारे भूभाग अक्साई चीन पर कब्जा किया. 1956 से 1962 की कहानी को जवाहरलाल लाल नेहरु अपनी खामी छिपाने के लिए देशवासियों को गुमराह कर बताते रहे. भारतीय सेना को 1952 में जब चीन की यह हरकत पता लगी तो उसने मेजर जनरल (उस वक्त कैप्टन) राजेन्द्र नाथ को जांच करने भेजा. उन्होंने 90 साल की उम्र में अपनी कहानी और नेहरु परिवार की सच्चाई स्ट्रैजेटिक लद्दाख में लिखी. वहां वे नजारा देखकर भौंचक्के रह गए, तिब्बत से लगभग लद्दाख तक चीन ने स्टेट ऑफ द आर्ट रोड बना लिया था, एयरपोर्ट था और पूरे अक्साई चीन को लगभग अपने कब्जे में ले लिया था. चीन से तिब्बत और लद्दाख की दूरी आधी हो गई थी.”

निशिकांत ने आगे लिखा, “यह रिपोर्ट देखकर नेहरुजी आग बबूला हो गए. इस रिपोर्ट को उन्होंने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया. नतीजा तिब्बत को चीन का हिस्सा माना, पंचशील का सिद्धांत बना और हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा लगा. जिस चीन के पास 1955 तक अपना हवाई जहाज नहीं था, उसे संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थाई सदस्य बनाया और 1962 के युद्ध में 38 हजार स्क्वायर किलोमीटर जमीन चीन ने कब्जा ली. 1952 की बात छुपाने, सेना की सूचना को नजरअंदाज करने को देशद्रोह कहा जाए या नहीं?”

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