
बर्लिन, 13 अक्टूबर . बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने जर्मनी के हनोवर शहर में एक विरोध रैली आयोजित कर बलूचिस्तान में Pakistanी सुरक्षा बलों की ओर से कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई. संगठन ने जबरन गायब किए जाने, बिना अदालती प्रक्रिया की हत्याओं और सैन्य अभियानों जैसे मुद्दों पर चिंता जताई.
Monday को यह रैली हनोवर के केंद्रीय क्रोपके क्षेत्र से शुरू हुई और शहर की सड़कों से होते हुए लोअर सैक्सनी राज्य संसद तक पहुंची.
बीएनएम के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद के बाहर नारे लगाए और लोगों को बलूचिस्तान की स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए पर्चे बांटे.
प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि इन मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और बलूच जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. सभा को बीएनएम के कार्यकर्ता आसिफ बलूच और आकिब बलूच ने संबोधित किया. उनके साथ पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) के प्रतिनिधि सईद मोमंद और फजल मीना खेल भी मौजूद रहे.
बीएनएम ने कहा कि वक्ताओं ने जबरन गायब किए जाने, मनमानी गिरफ्तारियां, यातना और आम नागरिकों की मौतों जैसे मुद्दों को उठाया. उन्होंने बलोच और पश्तून समुदायों के बीच एकता और व्यावहारिक सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया.
संगठन के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ की रिपोर्टों का हवाला देते हुए वक्ताओं ने अगस्त 2026 में बलूचिस्तान के पंजगुर जिले में कई नागरिकों की कथित गैर-न्यायिक हत्याओं पर चिंता व्यक्त की. इनमें पीर जान, शोएब बलूच, हाफिज मुदस्सिर, वजीर अहमद और जासिम के नाम शामिल बताए गए.
वक्ताओं ने सैन्य हवाई हमलों और ड्रोन हमलों में हुई नागरिक मौतों सहित सभी घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी इन घटनाओं पर ध्यान देने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की.
बीएनएम ने दोहराया कि उसके अनुसार बलूच लोगों को स्वतंत्रता और अपने Political भविष्य का फैसला करने का अधिकार है. संगठन का कहना है कि बलूचिस्तान के मुद्दे का समाधान बल प्रयोग के बजाय मानवाधिकारों, न्याय और आत्मनिर्णय के अधिकार के सम्मान के आधार पर होना चाहिए.
इस महीने की शुरुआत में बीएनएम ने अमेरिका के सिएटल शहर में भी एक विरोध प्रदर्शन किया था. वहां संगठन ने बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, सैन्य अभियानों और बमबारी के मुद्दों को लोगों के सामने उठाया.
बीएनएम के अनुसार, वक्ताओं ने अमेरिकी जनता से बलूचिस्तान में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की. उनका कहना था कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे से Pakistan को मिलने वाली मदद ‘अप्रत्यक्ष रूप से Pakistanी सेना का समर्थन करने’ में इस्तेमाल हो रही है.
वक्ताओं ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान में जारी हिंसा, सैन्य अभियानों और संघर्षों के कारण आम नागरिकों की जान जा रही है.
उन्होंने अमेरिकी Government से Pakistan के साथ अपने संबंधों और दी जाने वाली सहायता की समीक्षा करने का आग्रह किया. साथ ही कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता को मानवाधिकारों के सम्मान से जोड़ा जाना चाहिए.
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एवाई/एबीएम
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