बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन की मांग, Supreme Court ने केंद्र से मांगा जवाब, 3 दिसंबर को अगली सुनवाई

New Delhi, 16 अक्टूबर . बच्चों के social media इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग वाली याचिका पर Supreme Court ने केंद्र Government को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी.

यह याचिका एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके निदेशक ने Supreme Court में दायर की है. याचिका में कहा गया है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना राज्य Government और केंद्र Government की संवैधानिक जिम्मेदारी है. social media के कारण बच्चे कई तरह की मानसिक और शारीरिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं. ऐसी स्थिति में बच्चों के social media के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है.

याचिकाकर्ताओं ने बच्चों द्वारा social media के इस्तेमाल से उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर गहरी चिंता जताई है. याचिका में कहा गया है कि social media का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों में डिप्रेशन, घबराहट, चिंता, भावनात्मक परेशानी और कम आत्मसम्मान जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.

इसके अलावा, याचिका में बच्चों के व्यवहार से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने और ऐसे प्लेटफॉर्म डिजाइन का इस्तेमाल करने का मुद्दा भी उठाया गया है, जिनका मकसद बच्चों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर उलझाए रखना होता है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इनमें से कुछ खतरे तुरंत सामने नहीं आते और अक्सर माता-पिता या शिक्षकों को इनका पता तब तक नहीं चलता, जब तक कि काफी नुकसान न हो चुका हो.

social media और स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है और इसी को देखते हुए Supreme Court का यह नोटिस अहम माना जा रहा है. कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि करीब 37 प्रतिशत बच्चे डिप्रेशन, एंग्जायटी (चिंता) और साइबर बुलिंग (ऑनलाइन उत्पीड़न) से पीड़ित हैं. करीब 12 से 13 वर्ष की उम्र के बच्चों में social media के कारण चिंता और अवसाद का खतरा दोगुना हो जाता है.

–

एएस