
कोलकाता, 1 नवंबर . भारतीय जनता पार्टी के विधायक रुद्रनील घोष और पापिया अधिकारी Sunday को कोलकाता सिने और टीवी फ्रीलांस ड्राइवर यूनियन चुनाव देखने के लिए टॉलीगंज टेक्नीशियन स्टूडियो पहुंचे. इस दौरान रुद्रनील घोष ने कहा कि बंगाल में कुछ करने की जगह नहीं मिल रही तो विपक्षी दिल्ली जाकर मॉक पार्लियामेंट जैसा मजाक कर रहे हैं. वहीं फिल्म इंडस्ट्री चुनाव पर उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के पुराने शासन में हर सेक्टर की तरह बंगाली फिल्म इंडस्ट्री भी मसल पावर और Political दबाव से ध्वस्त हो गई थी.
भाजपा विधायक रुद्रनील घोष ने कहा, “ये लोग अपना मॉक कर रहे हैं, मॉक का मतलब मजाक. असली सच्चाई क्या है? यह केवल बंगाल के लोगों को नहीं, दुनिया के लोगों को मालूम है. कौन लोग अशांत परिवेश तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, ये सब देख रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बंगाल में कुछ करने की जगह नहीं मिल रही है, तो वहां जा रहे हैं. लोकतांत्रिक परिवेश है. कौन किधर जाएगा, कहां कौन मूंगफली खाएगा, मुसंबी, नींबू खाएगा या खाएगी, इसके विषय में टिप्पणी करना उचित नहीं है. वे लोग मजाक करना चाहते हैं, आनंद लेना चाहते हैं तो यह उनकी मर्जी है. हर कोई अपने दुखी मन को सुधारने का तरीका चुनता है तो वे लोग भी चुनेंगे, फिर से आ जाएंगे.
टीएमसी और अभिषेक बनर्जी से संबंधित एक अन्य मामले पर उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ इतने सारे मामले, इतनी सारी शिकायतें हैं, जिनका मुकदमा कोर्ट में चल रहा है तो उसको लेकर क्या बोल सकते हैं? यह उनकी आदत है, उनका नाम इसी में आता है. अच्छा वकील लगाइए, बस यही बोल सकते हैं हम लोग. बाकी न्यायाधीश और कोर्ट विचार करेंगे. न्यायाधीश के खिलाफ अभिषेक बनर्जी, उनकी टीम और उनकी पार्टी हर वक्त गालियां देती थी, बहुत दुखदायक है.
भाजपा विधायक ने कहा कि बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में पहली बार ऐसे चुनाव होने का अवसर मिला है और इसके लिए सबसे पहले मैं बंगाल की जो आवाम है, बंगाल के जो नागरिक हैं, उनको धन्यवाद देना चाहता हूं.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का पुराना शासन था, उस समय हर जगह, हर सेक्टर में उनका दबाव था. मतलब कानून की किताब में जो लिखा है, संविधान में जो लिखा है, उसको तोड़ते हुए जो जी चाहे वह करो. मसल पावर का उपयोग करो, Political शक्ति का उपयोग करो, लोकतंत्र को खत्म कर दो. हर जगह, हर क्षत्र में यह देखने को मिला. उससे यह बंगाली फिल्म इंडस्ट्री भी बच नहीं पाई. वह ध्वस्त हो गई थी.
भाजपा विधायक ने कहा कि हमारे जो तकनीशियन भाई लोग हैं, बैंड वाले लोग हैं, वे लोग अपनी इच्छा अनुसार काम नहीं कर सकते थे. सबसे पहले यह बोलना चाहता हूं कि पहली बार ऐसी Police सुरक्षा में, cctv कैमरों की मौजूदगी में पूरी तरह से निष्पक्ष चुनाव हो रहे हैं और हर तकनीशियन अभी खुश है. यह पहली बार बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में देखने का अवसर मिला है कि हर कोई खुशी से अपने मन की बात व्यक्त कर रहा है.
उन्होंने कहा कि मैं धन्यवाद देना चाहता हूं सुवेंदु अधिकारी को कि जनता के आशीर्वाद पर नई Government बनने के बाद से हमारी इस बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के हर तकनीशियन भाई, जिनके बिना कोई फिल्म, कोई सीरियल, कोई वेब सीरीज, कोई डॉक्यूमेंट्री बन ही नहीं सकती, उनके बीच जो भेदभाव किया गया था, वह दूर हुआ है.
भाजपा विधायक ने कहा कि तकनीशियन भाइयों के साथ, कलाकारों, निर्माताओं और निर्देशकों, सभी का सम्मान टूट गया था. अब उसे जोड़ने का अवसर मिला है, जो आनंद की बात है.
उन्होंने कहा कि 23 ट्रेड यूनियनों के संगठन यानी गिल्ड का चुनाव हो रहा है. कुल 333 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. Saturday को शुरुआत हुई थी और Sunday अंतिम दिन है. इसके बाद परिणाम आने शुरू हो जाएंगे. ये Lok Sabha या विधानसभा जैसे चुनाव नहीं होते. यह चुनाव ट्रेड यूनियनों और लेबर कमीशन के नियमों और नीतियों के अनुसार होता है.
भाजपा विधायक ने कहा कि काम के विभाजन के अनुसार अलग-अलग समूह गिल्ड कहलाता है. उन्हीं का चुनाव होता है. उनमें से जो उम्मीदवार खड़े होते हैं और उनके विपक्ष में जो खड़े होते हैं, वे एक-दूसरे के दोस्त होते हैं, एक-दूसरे के सहकर्मी होते हैं. उनमें से जिन्हें लोग अधिक पसंद करेंगे, उन्हें चुनाव जिताएंगे. इन 23 गिल्ड का चुनाव हो जाने के बाद जो लोग जीतेंगे, उनमें से हर गिल्ड के 5 व्यक्ति मुख्य समिति यानी फेडरेशन के गठन के लिए फिर से चुनाव लड़ेंगे या फिर मतदाता बनेंगे.
पापिया अधिकारी ने कहा कि यह तो निर्विरोध है. उन्हें चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं दिया गया. उन्हें कार्ड भी नहीं दिया गया. चुनाव लड़ने की अनुमति ही नहीं दी गई. यह जो चुनाव हो रहा है, यह ठीक नहीं है. कारण यह है कि जो लोग उस समय विरोध कर रहे थे, उन्हीं लोगों को कार्ड दिया गया है और उन्हें बांट भी दिया गया है. तो यह ठीक बात नहीं है. मिथुन चक्रवर्ती ने कहा है कि सबको काम करना पड़ेगा, सबको साथ लेकर चलना पड़ेगा, तब जाकर ठीक होगा.
उन्होंने कहा कि यह भी हमें देखना पड़ेगा कि वे लोग ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं. काम सबको करना चाहिए, मिथुन चक्रवर्ती ने बोला है. नहीं तो यह चुनाव ठीक नहीं होगा.
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