बंगाल: एसईआर ने कर्मचारियों को जीवन बचाने वाले कौशल का प्रशिक्षण देना किया शुरू

कोलकाता, 22 सितंबर . रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, साउथ ईस्टर्न रेलवे (एसईआर) ने अपने कर्मचारियों को जान बचाने वाले कौशल की ट्रेनिंग देने के लिए एक अभियान शुरू किया है. अधिकारियों ने बताया कि ये कौशल आपातकालीन स्थितियों में जान बचाने में मदद करेंगे.

कोलकाता के गार्डन रीच में 22 सितंबर को एसईआर हेडक्वार्टर में पूरे जोन के लिए ‘हैंड्स-ऑन कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) ट्रेनिंग प्रोग्राम’ शुरू हुआ. इसका मुख्य मकसद प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के जरिए हेडक्वार्टर और डिवीजन के कम से कम 20 प्रतिशत कर्मचारियों को जान बचाने वाली जरूरी सीपीआर स्किल्स में ट्रेन करना है.

यह ट्रेनिंग प्रोग्राम एसईआर के मेडिकल डिपार्टमेंट और सेंट जॉन्स एम्बुलेंस ब्रिगेड के साथ मिलकर चलाया जा रहा है. यह तीन महीने तक चलेगा.

एक अधिकारी ने कहा, “एसईआर के तहत अलग-अलग रेलवे ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के ट्रेनिंग शेड्यूल में भी इसी तरह के हैंड्स-ऑन सीपीआर और बीएलएस ट्रेनिंग सेशन शामिल किए जा रहे हैं. यह प्रोग्राम जोन के अलग-अलग डिवीजनल हेडक्वार्टर और हेल्थ यूनिट में पहले ही शुरू हो चुका है.”

दिन के समय हेडक्वार्टर में 68 चुने हुए कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में तीन मुख्य हिस्से शामिल थे. सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, पुतलों का इस्तेमाल करके प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, और प्रतिभागियों की समझ को परखने के लिए मल्टीपल-चॉइस सवालों-जवाबों का सेशन. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आयोजकों ने सफल प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट बांटे.

अधिकारी ने कहा, “इस पहल का मकसद रेलवे कर्मचारियों में जागरूकता और तैयारी को बढ़ाना है, ताकि वे मेडिकल इमरजेंसी के दौरान सही तरीके से काम कर सकें और समय पर मदद करके लोगों की जान बचा सकें.”

सीपीआर की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का प्रोग्राम गार्डन रीच हेडक्वार्टर में हर हफ्ते एक बार तब तक चलाया जाएगा, जब तक सभी विभागों के कर्मचारी इसमें शामिल नहीं हो जाते.

अधिकारी ने आगे कहा, “ये स्किल्स न सिर्फ़ काम के दौरान ही काम आएंगी, बल्कि तब भी मददगार साबित होंगी जब ये लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ हों या कहीं आ-जा रहे हों.”

सीपीआर कार्डियक अरेस्ट के बाद जान बचाने में मदद करता है. इसकी जरूरत दुर्घटना वाली जगहों पर या आग लगने या इमारत गिरने जैसी घटनाओं में लोगों को बचाने के बाद भी पड़ सकती है.

डीकेपी