बंगला साहिब में पुलिस कार्रवाई से सिख भावनाएं आहत, जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई : परमजीत सिंह सरना

New Delhi, 11 अक्टूबर . शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली Police के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में Police के प्रवेश पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने इस घटना को सिख मर्यादा और परंपरा के खिलाफ बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली Police कमिश्नर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.

परमजीत सिंह सरना ने से बातचीत में कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसने सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में 1947 के बाद पहली बार 1955 में Police दरबार साहिब आई थी. उस समय पंजाब के Chief Minister भीमसेन सच्चर थे. इस घटना के बाद सिखों में भारी रोष फैला था, जिसके चलते कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप को उनका इस्तीफा लेना पड़ा था और प्रताप सिंह कैरों को Chief Minister बनाया गया था. इसके बाद 1984 में भी ऐसी घटना हुई.

सरना ने कहा कि इतने सालों में यह पहली बार हुआ हैl जब दिल्ली Police गुरुद्वारा बंगला साहिब आई है. गुरुद्वारा बंगला साहिब आठवें पातशाह श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी का ऐतिहासिक गुरुद्वारा है. यह वही स्थान है जहां गुरु साहिब दिल्ली प्रवास के दौरान ठहरे थे. ऐसे पवित्र स्थल में प्रदर्शनकारियों के नाम पर Police के आने को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने बताया कि यह घटना सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई, जब कुछ प्रदर्शनकारी अशोक रोड की तरफ से गुरुद्वारा परिसर में आए थे. दिल्ली Police के हेडक्वार्टर ने बयान जारी कर कहा है कि Police सिर्फ वहां से क्रॉस कर रही थी, लेकिन सरना ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके पास वीडियो मौजूद है जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि 20 से 25 Policeकर्मी उन लड़कों का पीछा करते हुए गुरुद्वारे तक आए थे. यह सिर्फ क्रॉस करने की बात नहीं थी, बल्कि पीछा करने की कार्रवाई थी.

परमजीत सिंह सरना ने कहा कि सिख धर्म में गुरुओं के समय से एक परंपरा चली आ रही है. गुरु घर के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं. कोई भी व्यक्ति गुरुद्वारे में आ सकता है, उसे रहने और ठहरने की पूरी व्यवस्था दी जाती है. यह सिख धर्म का बुनियादी हिस्सा है. जो भी गुरु की शरण में आता है, गुरुद्वारे में आता है, उसे लंगर चखाया जाता है और ठहरने की जगह दी जाती है, लेकिन किसी भी तरह की गैर-गतिविधि की इजाजत वहां नहीं है और आज तक किसी ने ऐसी कोई गतिविधि नहीं की है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली Police का गुरुद्वारे के अंदर जाना पूरी तरह से गलत था. आम फोर्सेस को सही तरीके से ब्रीफ नहीं किया गया था कि किसी भी हालत में गुरुद्वारे के अंदर नहीं जाना है. गुरुद्वारे के दो दरवाजे हैं, Police को एक दरवाजे पर और दूसरे दरवाजे पर खड़ा हो जाना चाहिए था. अगर कोई बाहर आता तो उसे पकड़ा जा सकता था. अगर किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ बाहर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन गुरुद्वारे के अंदर चले जाना कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि मर्यादा का उल्लंघन है.

सरना ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान इस कार्रवाई को उचित ठहरा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह सबसे ज्यादा नाकाबिले-बर्दाश्त बात है. गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान का काम गुरुद्वारे की मर्यादा की रक्षा करना है, न कि Police की कार्रवाई का बचाव करना. अगर कोई प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे के अंदर आ भी गया तो यह गुरुद्वारा प्रबंधक का काम है कि वह उसे समझाए. उन्हें पहले ही गुरुद्वारे के मुलाजिमों और मैनेजर को यह निर्देश देना चाहिए था कि अगर इस संघर्ष के दौरान कोई लड़के अंदर आते हैं तो उन्हें एक तरफ ले जाकर कहा जाए कि लंगर-पानी कर चले जाएं. अगर वे ठहरना चाहते हैं तो उन्हें मना नहीं किया जा सकता, बशर्ते वे गुरुद्वारे की मर्यादा का पालन करें.

परमजीत सिंह सरना ने कहा कि दिल्ली Police कमिश्नर बहुत नेक इंसान हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुद्वारे की मर्यादा को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं. उन्हें इस मामले में स्पष्ट निर्देश देने चाहिए कि अगर कोई प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे में चला गया है तो Police को गुरुद्वारे के अंदर नहीं जाना चाहिए. उन्होंने खुद दरबार साहिब अमृतसर में देखा है कि कई Police अधिकारी जब माथा टेकने जाते थे तो सादे कपड़ों में जाते थे, वर्दी पहनकर नहीं जाते थे. वर्दी में गुरुद्वारे के अंदर जाना सिख धर्म की मर्यादा और परंपरा के बिल्कुल अनुकूल नहीं है.

सरना ने कहा कि जो हो गया है, उसे ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन भविष्य के लिए सबक लेना जरूरी है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के असली दोषी दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान हैं, जिन्होंने दिल्ली के एक मंत्री के कहने पर इस तरह के बयान दिए हैं. उन्होंने कहा कि मैंने देखा कि वह पढ़कर बोल रहे थे, फिर देख रहे थे और फिर बोल रहे थे. इतना गलत बयान देने के बाद वह सिख कौम को अपना मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे.

परमजीत सिंह सरना ने कहा कि हर धर्म स्थल की मर्यादा और परंपरा की रक्षा की जानी चाहिए, चाहे वह गुरुद्वारा हो, मंदिर हो या मस्जिद हो. हमें अपने गुरुओं की बताई हुई मर्यादा और परंपरा पर ही चलना है. यह किसी Government या पार्टी के खिलाफ या हक में नहीं है, बल्कि गुरुद्वारों की परंपरा की रक्षा करना हमारा हक है और हम इसे हर हाल में, जी-जान से करेंगे.

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पीआईएम/