फ्रांस हिंसा: जेडी वेंस का आव्रजन नीति पर सवाल, बोले- लिबरल्स ने चेतावनी नहीं सुनी

वाशिंगटन, 18 अक्टूबर . अमेरिका के उपPresident जेडी वेंस ने फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन और ऐतिहासिक इमारत में आगजनी की घटनाओं का हवाला देते हुए पश्चिमी देशों की उदारवादी नीतियों और आव्रजन व्यवस्था की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया कि “विविधता और करुणा” के नाम पर अपनाई गई नीतियों में प्रवासियों के स्थानीय समाज में समायोजन और सांस्कृतिक अनुकूलता जैसे महत्वपूर्ण सवालों की अनदेखी की गई.

वेंस ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा, “पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर फ्रांस और दूसरे देशों में ‘तीसरी दुनिया’ को अपने यहां जगह दी. इन नीतियों के संभावित परिणामों को लेकर पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन संबंधित नेताओं ने उन पर ध्यान नहीं दिया.”

उन्होंने फ्रांस को एक खूबसूरत देश और वहां के लोगों को अद्भुत बताते हुए उम्मीद जताई कि देश इस स्थिति को रोकने के लिए कदम उठाएगा ताकि उसके और ऐतिहासिक स्थलों को आग से नुकसान न पहुंचे.

अमेरिकी उपPresident ने इस मुद्दे को अमेरिकी राजनीति से भी जोड़ा. उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से फ्रांस की घटनाओं पर ध्यान देने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि “अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सांसद भी अपने देश को इसी दिशा में ले जाना चाहते हैं.”

वेंस की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पश्चिमी देशों में आव्रजन, राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक एकीकरण और बहुसांस्कृतिक समाज की नीतियों को लेकर Political बहस जारी है. इन मुद्दों पर Political दलों के बीच मतभेद हैं. एक पक्ष आव्रजन को आर्थिक विकास, श्रमबल और सांस्कृतिक विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानता है, जबकि दूसरा पक्ष सामाजिक एकीकरण, सुरक्षा और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी चुनौतियों पर जोर देता है.

हालांकि, किसी ऐतिहासिक इमारत में आग लगने की घटना को सीधे आव्रजन या किसी विशेष समुदाय से जोड़ने के लिए जांच और विश्वसनीय साक्ष्यों की आवश्यकता होती है. वेंस की टिप्पणी उनकी Political व्याख्या और आव्रजन नीतियों पर उनके विचारों को दर्शाती है.

Saturday को लिमोज शहर के 143 साल पुराने टाउन हॉल में आग लगा दी गई. आग से ऐतिहासिक इमारत को भारी नुकसान पहुंचा. ये 1883 में बनकर तैयार हुआ था और फ्रांस के ऐतिहासिक स्मारकों की सूची में शामिल था. 17 अक्टूबर को फ्रांस के विभिन्न शहरों में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की और इमारत को आगे के हवाले कर दिया गया.

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केआर/