फॉर्म-6 ही मुख्य मुद्दा, सीईसी पद की गरिमा को ही खत्म कर दिया : उदित राज

New Delhi, 27 सितंबर . चुनाव आयोग में अंदरूनी असहमति के मुद्दे को लेकर सियासी घमासान के बीच Saturday को चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई. बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे. बैठक के बाद फॉर्म-6 विवाद को लेकर चुनाव आयोग ने कहा कि यह मुख्य मुद्दा नहीं है. इस बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

उदित राज ने कहा कि फॉर्म-6 ही सबसे बड़ा और मुख्य मुद्दा है. उन्होंने कहा कि 1960 के नियम के अनुसार फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. वोटर बनने के लिए सिर्फ तीन शर्तें जरूरी हैं – व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए, 6 महीने से वह उस जगह का निवासी हो और वह वोटर बनने के लिए योग्य हो.

उदित राज ने कहा कि एसआईआर का कोई कानूनी आधार ही नहीं है. यह न तो 1950 के नियम में है और न ही 1960 के नियम में. उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 की हार्ड कॉपी में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, लेकिन ऑनलाइन फॉर्म में बदलाव कर दिया गया है. इस बदलाव को कोई नहीं कर सकता. चुनाव आयोग के अंदर भी इस मुद्दे पर मतभेद है. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर लिखित में अपनी असहमति जताई थी, लेकिन अभी तक उसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के उस आरोप पर कि कांग्रेस अपने Political हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचा रही है, उदित राज ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तो संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए जी-जान से लड़ाई लड़ रही है. भाजपा उल्टी बात कर रही है.

उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में जो बदलाव किया गया है, उसके अनुसार अब 18 साल के युवाओं को वोटर बनने के लिए 2002 की वोटर लिस्ट में अपने माता-पिता या दादा-दादी का नाम दिखाना होगा. ऐसे में कोई भी नया वोटर नहीं बन पाएगा. 2002-2003 की वोटर लिस्ट से लिंक करने के कारण करोड़ों लोग वोटर नहीं बन पा रहे हैं, जबकि नियम के अनुसार सिर्फ 18 वर्ष की उम्र, भारतीय नागरिकता और उस क्षेत्र का सामान्य निवासी होना ही पर्याप्त है.

BJP MP संबित पात्रा के राहुल गांधी पर लगाए गए आरोप कि वह सत्ता न मिलने के कारण चुनाव आयोग और Supreme Court जैसी संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं, पर उदित राज ने कहा कि 2014 के बाद ऐसी कोई संस्था नहीं बची जिसे भाजपा ने निशाना न बनाया हो. उन्होंने आरोप लगाया कि 13 करोड़ 80 लाख वोटरों का नाम काटकर Lok Sabha 2024, बिहार, बंगाल, Haryana, दिल्ली और Maharashtra के चुनावों में बेईमानी से जीत हासिल की गई है. संविधान और उसकी संस्थाओं की रक्षा राहुल गांधी, कांग्रेस और पूरा विपक्ष कर रहा है. यह उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली बात है.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोलते हुए उदित राज ने कहा कि उन्होंने गैर-कानूनी काम किया है और उन्हें तुरंत जेल भेजना चाहिए. उन्होंने हजार अपराधियों से भी बड़ा अपराध किया है. ऐसा करना लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश जैसा है. ऐसे व्यक्ति को सीईसी नहीं मानना चाहिए, उन्होंने पद की गरिमा को ही खत्म कर दिया है.

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पीआईएम/एएस