
New Delhi, 5 अक्टूबर . फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है. पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि Supreme Court में सुनवाई के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का कथित झूठ सामने आ गया है.
उन्होंने कहा कि Supreme Court ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में बदलाव करने की कोई अनुमति उसकी ओर से नहीं दी गई थी.
सिसोदिया के मुताबिक, इससे सवाल उठता है कि चुनाव आयोग ने आखिर किस आधार पर फॉर्म-6 में बदलाव किए.
मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अपनी मर्जी से बदलाव किए और इस संबंध में न तो Supreme Court की अनुमति ली गई और न ही दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति ली गई. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में यह दावा किया गया था कि फॉर्म-6 में बदलाव Supreme Court की मंजूरी के बाद किए गए हैं, लेकिन अब अदालत की टिप्पणी से इस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं.
सिसोदिया ने कहा कि देश में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव बेहद गंभीर मामला है. उनके अनुसार, यदि इन बदलावों के कारण आम नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाना मुश्किल होता है, तो यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों के जरिए लोगों के वोट के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर देश की युवा पीढ़ी और जेन-जी सड़कों पर उतर रही है, उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
सिसोदिया ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति है.
वहीं, ‘आप’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 को जारी अपने प्रेस नोट में फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को Supreme Court के आदेश से जोड़कर पेश किया था.
भारद्वाज के मुताबिक, Monday को Supreme Court में सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐसा कोई आदेश देने से इनकार किया. सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग Supreme Court के नाम का इस्तेमाल कर ऐसा दावा कर सकता है, जिसे अदालत ने स्वयं स्वीकार नहीं किया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अदालत के नाम पर गलत जानकारी दी गई है तो यह बेहद गंभीर मामला है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए. भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों से बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक प्रभावित हो सकते हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और जो दोबारा अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं. हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है.
“आप” नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है. भारद्वाज ने यह भी कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा.
सौरभ भारद्वाज ने social media पोस्ट के जरिए भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि Monday की सुनवाई में फॉर्म-6 में बदलाव के मामले पर चुनाव आयोग की स्थिति कमजोर हुई है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चलाने की मांग दोहराई.
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सामने आए आरोपों और Supreme Court की कार्यवाही के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर Political बहस तेज हो गई है. अब इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण और Supreme Court की कार्यवाही का आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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पीकेटी/एएसएच
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