फॉकलैंड द्वीप विवाद: अर्जेंटीना इजरायली ऊर्जा कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करेगा

ब्यूनस आयर्स, 8 सितंबर . दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. पिछले कुछ महीनों से कई द्वीप चर्चा में बने हुए हैं. इनमें चागोस द्वीप, ईरान का खार्ग द्वीप, बांग्लादेश का सेंट मार्टिन द्वीप शामिल हैं. इस बीच एक और द्वीप सुर्खियां बटोर रहा है और ये फॉकलैंड द्वीप समूह है. जिसे लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच पुराना विवाद उभर आया है.

अर्जेंटीना Government ने Monday को ब्रिटिश नियंत्रण वाले फॉकलैंड द्वीप समूह में तेल परियोजना संचालित करने वाली इजरायली कंपनी ‘नाविटास पेट्रोलियम’ और उसके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने का ऐलान किया है.

President जेवियर मिलेई की ओर से Friday (4 सितंबर) को एक बयान जारी किया गया था. उनका आरोप है कि नाविटास और उससे जुड़ी कंपनियां उत्तरी फॉकलैंड बेसिन में हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन के लिए ब्रिटिश लाइसेंस का इस्तेमाल कर रही हैं, जो अर्जेंटीना के कानून का उल्लंघन है. विदेश मंत्री पाब्लो क्विरनो ने इस मामले को गंभीरता से उठाने का फैसला किया है.

विवाद के केंद्र में ‘सी लायन’ नाम की बड़ी अपतटीय तेल परियोजना है. इसे इजरायली कंपनी नाविटास संचालित कर रही है, जिसकी परियोजना में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ब्रिटेन की रॉकहॉपर एक्सप्लोरेशन भी इसमें भागीदार है. परियोजना से 2028 में तेल उत्पादन शुरू करने की योजना है.

अर्जेंटीना का कहना है, “फॉकलैंड द्वीपों के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का अधिकार हमारे (अर्जेंटीना) पास है और हमारी अनुमति बिना वहां तेल गतिविधियां चलाना गैरकानूनी है.” Government ने कंपनियों के अलावा उनके निदेशकों और संबंधित साझेदारों को भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाने की बात कही है.

ब्रिटिश मीडिया आउटलेट ‘द गार्डियन’ के मुताबिक नाविटास और रॉकहॉपर का कहना है कि उनकी परियोजना फॉकलैंड द्वीप Government द्वारा कानूनी रूप से जारी किए गए पेट्रोलियम लाइसेंस के तहत संचालित हो रही है और उसे ब्रिटिश Government का समर्थन प्राप्त है.

President मिलेई ने हाल के दिनों में फॉकलैंड द्वीपों पर अर्जेंटीना के दावे को पहले से कहीं अधिक आक्रामक अंदाज में उठाया है. उन्होंने तेल परियोजनाओं को अर्जेंटीना के राष्ट्रीय हित और संप्रभुता के लिए खतरा बताया है.

मिलेई का यह रुख ऐसे समय आया है जब अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फॉकलैंड द्वीपों को लेकर अपनी मौजूदा नीति की समीक्षा कर सकता है. मिलेई ने इन टिप्पणियों को अर्जेंटीना के पक्ष में बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के संकेत के तौर पर पेश किया है. हालांकि, अमेरिका आधिकारिक तौर पर इस संप्रभुता विवाद पर तटस्थ रुख रखता है, जबकि व्यवहार में वह ब्रिटिश प्रशासन को मान्यता देता है.

ब्रिटिश Government ने मिलेई के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि फॉकलैंड द्वीप ब्रिटिश रहेंगे और वहां के लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा. 1982 में अर्जेंटीना के द्वीपों पर कब्जे के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें ब्रिटेन ने द्वीपों पर फिर नियंत्रण स्थापित कर लिया था.

इस तरह तेल और गैस की दौड़ ने दशकों पुराने फॉकलैंड विवाद को एक बार फिर आर्थिक और भू-Political संघर्ष में बदल दिया है. अर्जेंटीना जहां तेल परियोजना को अपनी संप्रभुता के खिलाफ कदम मान रहा है, वहीं परियोजना संचालक इसे फॉकलैंड Government द्वारा दिए गए वैध लाइसेंस के तहत चलने वाला व्यावसायिक उपक्रम बता रहे हैं.

केआर/