फार्मा ड्रग डायवर्जन नेटवर्क पर एनसीबी की बड़ी कार्रवाई, 20.10 करोड़ रुपए की 25 संपत्तियां फ्रीज

चंडीगढ़, 1 नवंबर . नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अंतरराज्यीय फार्मास्यूटिकल ड्रग डायवर्जन मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 20.10 करोड़ रुपए मूल्य की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज करने के अपने आदेश की पुष्टि करवा ली है. New Delhi स्थित सक्षम प्राधिकरण ने 30 अक्टूबर को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 68एफ(2) के तहत एनसीबी के 2 अक्टूबर के फ्रीजिंग आदेश को बरकरार रखा.

जांच में सामने आया कि अवैध रूप से डायवर्ट की गई दवाओं की बिक्री से प्राप्त धनराशि को विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर वैध दिखाने का प्रयास किया गया. आरोपियों द्वारा संपत्तियों की खरीद के लिए आय के वैध स्रोत साबित नहीं किए जा सके.

फ्रीज की गई 25 संपत्तियों में औद्योगिक प्लॉट, व्यावसायिक इकाइयां, शॉप-कम-ऑफिस यूनिट और आवासीय फ्लैट शामिल हैं. इनमें मोहाली के गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, मोहाली सिटी सेंटर-3, मोहाली सिटी सेंटर वॉक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वीनस्टाउन स्थित संपत्तियां प्रमुख हैं. फ्रीजिंग के बाद इन संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण या किसी अन्य प्रकार के लेनदेन पर रोक रहेगी.

एनसीबी ने कहा कि उसकी रणनीति केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि तस्करी नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमजोर करने पर भी केंद्रित है. एजेंसी ड्रग सप्लाई चेन के साथ-साथ उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की समानांतर जांच कर रही है ताकि निर्माताओं, वितरकों, फर्जी कंपनियों और आर्थिक मददगारों तक पहुंचा जा सके.

यह मामला 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से शुरू हुआ था. पैकिंग पर निर्माता के रूप में एम/एस जे.आर. फार्मास्युटिकल्स, हरिद्वार और विपणनकर्ता के रूप में एम/एस तिवारी मेडिकल एजेंसीज, देहरादून का नाम दर्ज था.

जांच में पता चला कि विपणन करने वाली कंपनी अस्तित्व में ही नहीं थी. इसके बाद एनसीबी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने सप्लाई चेन की पड़ताल की और उत्तराखंड तथा Himachal Pradesh की कई फार्मा कंपनियों द्वारा दवाओं को फर्जी संस्थाओं के माध्यम से अवैध बाजार में भेजे जाने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया.

इस मामले में अब तक लगभग 34 लाख साइकोट्रॉपिक टैबलेट, 10.57 लाख बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप, 50,000 ट्रामाडोल एम्प्यूल, 5,000 मिडाजोलम वायल लगभग 2,200 किलोग्राम साइकोट्रॉपिक पाउडर (कच्चा माल और तैयार उत्पाद सहित) बरामद किए जा चुके हैं.

जांच के दौरान 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. नेटवर्क का विस्तार पंजाब, Himachal Pradesh, Rajasthan , उत्तराखंड, Haryana, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों तक पाया गया है. जांच के दौरान Himachal Pradesh के कालाअंब स्थित एम/एस डिजिटल विजन और एम/एस वेलिन्टन हेल्थकेयर से बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक दवाएं और कच्चा माल बरामद किया गया.

वहीं, कोनिक गोयल, मानिक गोयल और उनके पिता परशोत्तम लाल गोयल, निवासी अंबाला कैंट (Haryana), बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद फरार हैं. उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को Supreme Court खारिज कर चुका है. फ्रीज की गई संपत्तियों में इनके और इनके परिजनों के नाम पर संपत्तियां भी शामिल हैं.

एनसीबी ने नागरिकों से ड्रग तस्करी से जुड़ी किसी भी सूचना को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 पर साझा करने की अपील की है. एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.

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एएमटी/एबीएम