फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर भाजपा सांसद राजीव भारद्वाज बोले- ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाता

कांगड़ा, 25 अक्टूबर . भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लिखे गए ‘फ्री शरजील इमाम’ और ‘फ्री उमर खालिद’ जैसे नारों की कड़ी निंदा की. साथ ही उन्होंने 1 नवंबर को इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर व्यापारियों की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ मुद्दों को लेकर पूरी दिल्ली को जाम करना उचित नहीं है. वहीं फारूक अब्दुल्ला के बयान पर उन्होंने कहा कि वे कभी-कभी ऐसे बयान दे देते हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया जाता.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ राजीव भारद्वाज ने कहा, “‘फ्री शरजील इमाम’ और ‘फ्री उमर खालिद’ जैसे संदेशों का संबंध उन्हीं विचारों से है, जिनके साथ कभी ‘India तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह’ जैसे नारे जुड़े रहे हैं. यह वही स्थान है, जहां इस प्रकार की बातें कही गई थीं. इसलिए यदि वास्तव में दीवारों पर ऐसा कुछ लिखा गया है, तो मैं उसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं. India राष्ट्रवाद की भावना से चलता है. इस देश में राष्ट्र सर्वोपरि है. ‘नेशन फर्स्ट, संगठन बाद में और स्वयं सबसे बाद में’ की भावना से यह देश आगे बढ़ता है. ऐसी राष्ट्रविरोधी और देशविरोधी सोच रखने वाली ताकतों के लिए इस देश में कोई स्थान नहीं है.

1 नवंबर को इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर व्यापारियों की अपील पर उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली के सभी व्यापारियों का पूर्ण समर्थन करता हूं. केवल कुछ मुद्दों को लेकर पूरी दिल्ली को जाम कर देना उचित नहीं है. मैं कांग्रेस, जो हमारा विपक्षी दल है, उसके नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कहना चाहता हूं कि देश लोकतंत्र से चलता है, भीड़तंत्र से नहीं. मैं विपक्षी दलों और उनके सहयोगी दलों से भी आग्रह करना चाहता हूं कि दिल्ली India का दिल है. यहां पूरे देश से लोग आकर बसते हैं. यदि व्यापारियों ने इस प्रकार की अपील की है, तो निश्चित रूप से उनके कामकाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा होगा. इसलिए मैं उनकी इस अपील का शत-प्रतिशत समर्थन करता हूं.

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर उन्होंने कहा कि फारूक साहब के विषय में क्या कहा जाए. वे एक वरिष्ठ Political नेता हैं और एक प्रदेश के पूर्व Chief Minister भी रह चुके हैं. वे कभी-कभी ऐसे बयान दे देते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता. इसलिए मुझे नहीं लगता कि उनके इस बयान को कोई विशेष महत्व दिया जाना चाहिए.

BJP MP ने कहा कि मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी, उसके सहयोगी दल और विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की राजनीति का तरीका यही है कि वे देश में अराजकता और भीड़तंत्र को बढ़ावा देना चाहते हैं, लेकिन मैं आपके चैनल के माध्यम से राहुल गांधी और उनके सहयोगी दलों से कहना चाहता हूं कि यह देश एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है. यहां जनता अपना निर्णय वोट के माध्यम से देती है. लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सत्ता का चयन होता है. अराजकता फैलाकर इस देश में कुछ हासिल नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा कि जहां तक सिख दंगों का प्रश्न है, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में जो भयावह हिंसा हुई थी, उसे देश आज भी नहीं भूला है. हमारे सिख भाइयों के साथ जो कुछ हुआ, वह अत्यंत दुखद और निंदनीय था. ऐसी घटनाएं देश के इतिहास के दर्दनाक अध्याय हैं. इसलिए जो लोग आज लोकतंत्र की बात करते हैं, उन्हें उस दौर और उन घटनाओं पर भी स्पष्ट रूप से अपनी बात रखनी चाहिए.

डॉ राजीव भारद्वाज ने कहा कि India विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. यहां सत्ता परिवर्तन का माध्यम चुनाव है. यदि किसी Political दल में जनसमर्थन है, तो उसे चुनाव मैदान में उतरकर जनता का विश्वास जीतना चाहिए. लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने या भीड़तंत्र को बढ़ावा देने से कोई Political उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता. जनता हर पांच वर्ष में अपना निर्णय देती है और वही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है.

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा, “फारूक अब्दुल्ला का बयान बेहद गैर जिम्मेदाराना है. वे पढ़े-लिखे और काबिल इंसान हैं, उनसे ऐसे बयान की उम्मीद नहीं की जाती है. हालांकि Pakistan के प्रति उनका जो प्रेम है, वो कभी-कभी सामने आ जाता है. उन्होंने दावा किया है कि कश्मीर का मुद्दा आज Pakistan की वजह से जिंदा है और Pakistan कश्मीर को समर्थन देता है.”

उन्होंने कहा कि उन्हें सोचना चाहिए कि उनका अपना बेटा आज जम्मू-कश्मीर का Chief Minister है तो वो India के लोकतंत्र की वजह से है. फिर Pakistan कैसे कश्मीरी लोगों का समर्थक हो सकता है? एक Pakistan जिसने 1947 से कश्मीर में आतंकवाद को पाला-पोसा है, पैसों से मदद की है, वो कैसे कश्मीरियों का हितैषी हो सकता है?

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