फर्रुखाबाद के गांव में तप करके बाबा नीब करौली ने हासिल की थी सिद्धि, स्थानीय लोगों ने ‘हनुमान अंश’ को सराहा

फर्रुखाबाद, 6 सितंबर . बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की इस समय काफी सराहना हो रही है और लोग खूब पसंद कर रहे हैं. ऐसे में नीब करौरी धाम के मुख्य पुजारी श्री श्री त्यागी जी महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव, मंदिर के पुजारी और स्थानीय दुकानदार राम मोहन गुप्ता ने बाबा नीब करौरी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा, भगवान हनुमान के प्रति उनकी भक्ति और नीब करौरी धाम के इतिहास के बारे में बताया.

नीब करोरी धाम के मुख्य पुजारी श्री श्री त्यागी जी महाराज के अनुसार, फर्रुखाबाद जनपद के ग्राम नीब करोरी में लक्ष्मण दास महाराज ने तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की थी. वह यहां पर करीब 1912 से लेकर 1935 के बीच रहे. ग्राम नीब करोरी में सिद्धि प्राप्त करने के बाद बाबा लक्ष्मण दास का नाम नीब करौरी महाराज के नाम से मशहूर हो गया. इसके बाद बाबा जहां भी गए, वहां पर नीब करौरी धाम के नाम से ही आश्रम बनाया. नीब करौरी धाम में आज भी वह गुफा और हवन कुंड मौजूद है, जहां पर बैठकर बाबा लक्ष्मण दास महाराज ने सिद्धि प्राप्त की थी. यहां पर स्वयं के हाथों से उन्होंने भगवान हनुमान का गोबर के मिश्रण से विग्रह बनाया था और वह पीपल भी विराजमान है, जिसके नीचे बैठकर तपस्या करते थे.

मुख्य पुजारी के अनुसार, बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने जीवन में 108 हनुमान मंदिर देश के अलग-अलग शहरों में बनवाए, इनमें Lucknow में गोमती किनारे हनुमान सेतु मंदिर भी शामिल है. बाबा ने दो आश्रम भी बनवाए. पहला आश्रम कैंची (नैनीताल) और दूसरा वृंदावन (मथुरा) में है. वृंदावन आश्रम की स्थापना वर्ष 1967 में हुई थी. 11 सितंबर 1973 को बाबा ने वृंदावन स्थित आश्रम में महासमाधि ली थी.

बाबा नीब करौरी महाराज का मूल नाम पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा है. कहा जाता है कि जब पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा फर्रुखाबाद के गांव नीब करौरी में साधना में रत थे, तब उन्हें हनुमानजी के साक्षात दर्शन हुए. तब से बाबा का नाम नीब करोरी महाराज पड़ गया और आज भी उन्हें नीब करौरी बाबा के नाम से ही जाना जाता है.

नीब करौरी धाम के मुख्य पुजारी श्री-श्री त्यागी जी महाराज ने से बातचीत में कहा, “1912 से 1935 तक यहां तपस्या करके बाबा ने आध्यात्मिक शक्तियां (सिद्धि) हासिल कीं. उसदौरान एक भव्य भंडारा का आयोजन किया, जिसे बहुत शुभ (पुण्य का काम) माना जाता है. इस भोज के बाद 1935 के बाद बाबा यह जगह छोड़कर चले गए. बाबा को सभी आध्यात्मिक शक्तियां नीब करौरी गांव से ही प्राप्त हुईं. ऐसे में मुख्य स्थल यही है.”

फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव ने कहा, “हनुमान अंश फिल्म बहुत अच्छी है. मैं सभी से इसे देखने के लिए कहूंगी. बाबा जी सर्वव्यापी हैं, कैंची धाम हो या फर्रुखाबाद, बाबा जी यहां भी रहे और उन्होंने यहां समय बिताया, इस बारे में सभी को पता होना चाहिए. यह फिल्म हाउसफुल चल रही है और बहुत से लोग इसे देखने जा रहे हैं. अब लोगों को और जानकारी मिलेगी. हमारे देश और विदेश में सभी बाबा जी के बारे में जानते हैं.”

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “मुझे हनुमान अंश फिल्म बहुत बढ़िया लगी. इसमें नीब करौरी धाम के बारे में सब कुछ बताया गया है. साथ ही बाबा नीब करौरी के बारे में भी दिखाया गया है, पूरी फिल्म उन्हीं पर बनी है. महाराज जी के जन्म से लेकर कैंची धाम तक, सब कुछ फिल्म में दिखाया गया है.”

हनुमान मंदिर के पुजारी ने कहा, “बाबा नीब करौरी ने अपनी तपस्या की शक्ति से हनुमान जी की स्थापना की थी. हनुमान जी ने स्वयं बाबा को साक्षात दर्शन दिए थे. बाबा ने 1912 से 1935 तक यहां साधना की. यहां साधना करने के बाद बाबा जी आगे बढ़े और उत्तराखंड, दिल्ली, Lucknow की यात्रा की. वे पूरी दुनिया में इसी नाम से जाने जाते हैं.”

ओपी/एएस