फर्जी क्यूआर कोड से हो रहा व्हाट्सएप अकाउंट हैक, राजस्थान पुलिस ने जारी की चेतावनी

jaipur, 21 अक्टूबर . Rajasthan Police की आर-4-सी (Rajasthan साइबर क्राइम) शाखा ने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए सावधान रहने की सलाह दी है. Police के अनुसार, साइबर अपराधी फर्जी क्यूआर कोड और अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर रहे हैं.

अतिरिक्त Police महानिदेशक (एडीजीपी) साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि साइबर ठग फर्जी क्यूआर कोड, सोशल इंजीनियरिंग और ओटीपी चोरी जैसी तकनीकों का उपयोग करके व्हाट्सएप अकाउंट पर अवैध रूप से कब्जा कर लेते हैं.

अकाउंट हैक होने के बाद ठग पीड़ित की संपर्क सूची में मौजूद लोगों को मैसेज भेजते हैं और अक्सर मेडिकल इमरजेंसी या किसी अन्य जरूरी जरूरत का बहाना बनाकर पैसे मांगते हैं. इसके अलावा वे संदिग्ध लिंक भी भेज सकते हैं, ताकि और लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा सके.

Police अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी व्हाट्सएप अकाउंट पर कब्जा करने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, जिनमें फर्जी क्यूआर कोड या खतरनाक लिंक के जरिए अकाउंट को किसी अनजान डिवाइस से लिंक कराना. दोस्त, सरकारी अधिकारी या कस्टमर सपोर्ट प्रतिनिधि बनकर ओटीपी, वेरिफिकेशन कोड या टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिन हासिल करना. संदिग्ध ऐप्स के जरिए एसएमएस, नोटिफिकेशन या अन्य जरूरी अनुमतियों तक पहुंच बनाना. रिमोट एक्सेस या स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करवाकर मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में लेना शामिल है.

Rajasthan Police ने लोगों को कुछ चेतावनी संकेतों पर नजर रखने की भी सलाह दी है, जो अकाउंट हैक होने का संकेत हो सकते हैं.

Police ने नागरिकों से सावधानियां बरतने की अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति, वेबसाइट या संदिग्ध संदेश से मिले क्यूआर कोड को स्कैन न करें. व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन और मजबूत पिन जरूर सक्रिय करें. अपना ओटीपी, रजिस्ट्रेशन कोड या टू-स्टेप वेरिफिकेशन पिन किसी के साथ साझा न करें. किसी भी संदिग्ध लिंक या एप्लिकेशन पर क्लिक करने से बचें.

Rajasthan Police ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके साथ ऐसी कोई घटना होती है या ठगी का प्रयास किया जाता है, तो इसकी जानकारी तुरंत नजदीकी Police स्टेशन या साइबर Police स्टेशन को दें.

इसके अलावा शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है. वित्तीय साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है.

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एएमटी/डीकेपी