प्रीति जिंटा ने बॉलीवुड के 28 साल के सफर को किया याद, बोलीं- ‘कलाकार पर अच्छा काम देने का दबाव आज भी वैसा’

Mumbai , 9 सितंबर . Actress प्रीति जिंटा ने जब 90 के दशक के आखिर में फिल्मों में कदम रखा था, तब Bollywood का माहौल आज से काफी अलग था. कैमरे अलग थे, शूटिंग का तरीका अलग था और कलाकारों के लिए अपनी आवाज और अभिनय को लेकर भी एक अलग तरह की तैयारी करनी पड़ती थी. करीब 28 साल के अपने सफर में प्रीति ने न सिर्फ कई दौर की फिल्मों को देखा, बल्कि खुद उस बदलाव का हिस्सा भी बनीं, जिसने हिंदी सिनेमा को धीरे-धीरे नई दिशा दी.

सिनेमा में आए बदलाव और अपने लंबे सफर को लेकर उन्होंने से बताया कि एक चीज उन्हें आज भी वैसी ही लगती है और वह है कलाकार पर अच्छा काम देने का दबाव.

से खास बातचीत में प्रीति ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, ”मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे 90 के दशक के आखिर में फिल्मों में आने का मौका मिला. उस समय हिंदी सिनेमा में बदलाव की शुरुआत हो चुकी थी. फिल्म ‘क्या कहना’ एक अलग अनुभव लेकर आई. फिल्म की कहानी उस समय के हिसाब से अलग थी और एक नई Actress के तौर पर उसमें काम करना मेरे लिए बेहद खास था.”

प्रीति ने कहा, ”मेरे इंडस्ट्री में आने से पहले भी इस तरह की कहानियों पर फिल्में बन चुकी थीं, लेकिन मेरे लिए ऐसी फिल्म से शुरुआत करना काफी अलग बात थी. इसके कुछ ही समय बाद ‘दिल चाहता है’ आई और फिल्म बनाने के तरीके में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला. फिल्म में लाइव साउंड का इस्तेमाल किया गया, जिससे डबिंग बंद हो गई.”

प्रीति ने कहा, ”मैं उस बदलाव के समय का हिस्सा थीं. मेरे शुरुआती दिनों से लेकर आज तक फिल्में बनाने के तरीके में सबसे बड़ा बदलाव तकनीक का है. पहले फिल्मों की शूटिंग फिल्म कैमरों से होती थी, लेकिन अब डिजिटल कैमरों ने उसकी जगह ले ली है. इसके साथ ही बाद में फिल्म को ठीक करने के कई रास्ते भी मौजूद हैं, जो उनके शुरुआती दौर में नहीं थे. लेकिन एक चीज ऐसी है , जो आज भी नहीं बदली है और वह है कलाकार पर अच्छा काम देने का दबाव.”

प्रीति ने बताया कि उनके शुरुआती दौर में विदेश में रहने वाले भारतीयों की प्रेम कहानियां खूब देखने को मिलती थीं. उस समय कई फिल्में भारतीय परिवारों और विदेश की पृष्ठभूमि के बीच घूमती थीं. अब फिल्मों का ध्यान धीरे-धीरे India से जुड़ी कहानियों की तरफ ज्यादा गया है. आज भारतीय होने पर गर्व, देश का इतिहास और सेना जैसे विषयों पर फिल्में बन रही हैं. कॉमेडी फिल्मों का अंदाज भी बदला है.

पीके/एएस