
New Delhi, 23 अक्टूबर . बीकानेर हाउस में आयोजित कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से 70 से ज्यादा तस्वीरों को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बीकानेर हाउस प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी से तस्वीरों को हटाना कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “मैंने बीकानेर हाउस की नियमावली देखी, जिसमें लिखा है कि किसी भी तरह की Political, भ्रामक या विवादास्पद सामग्री नहीं होनी चाहिए, लेकिन मैं जानना चाहती हूं कि अगर एक क्रिएटिव फोटोग्राफर अपने आसपास हो रही घटनाओं को देखकर उसे विजुअलाइज करके तस्वीरें लेता है, जैसे कि विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें, तो उससे किस तरह का विवाद खड़ा हो सकता है.”
उन्होंने कहा, “यह कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बोलने की आजादी का मामला है. कुछ तस्वीरें किसी भी तरह का विवाद पैदा नहीं कर रही हैं. यह एक प्रत्यक्षदर्शी का वृत्तांत है. उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को Political बताकर उसे हटा देना कहां तक सही है. रेहान वाड्रा राजनीति में नहीं हैं, सिर्फ इसलिए कि वह एक Political परिवार से जुड़े हैं, उन पर पाबंदी लगाना गलत है. हर कलाकार को, खासकर क्रिएटिव आर्टिस्ट को अपने विजुअल्स और अपने अनुभवों को दिखाने का मौका मिलना चाहिए.”
दूसरी ओर Mumbai में शिवसेना नेता आनंद दुबे ने बीकानेर हाउस के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रबंधन का अधिकार है. उन्होंने कहा, “बीकानेर हाउस ने स्पष्टीकरण दिया है कि कुछ तस्वीरें उनकी नियमावली पर फिट नहीं बैठती थीं, इसलिए उन्हें हटाया गया. इसमें न तो कांग्रेस की बात है और न ही भाजपा की. एक कलाकार, कलाकार होता है. आप किसी भी क्षेत्र में हों, आप अच्छे फोटोग्राफर हैं, अच्छे कलाकार हैं, आप प्रदर्शनी लगाइए, लेकिन अगर कोई प्रदर्शनी आपत्तिजनक है तो उसे हटाने का अधिकार बोर्ड के पास है, उस जगह के प्रबंधन के पास है.”
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर कांग्रेस पार्टी इसे मुद्दा बना रही है और इसे रॉबर्ट वाड्रा के परिवार से जोड़ रही है, तो उनकी मानसिक स्थिति पर क्या कहा जाए.”
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पीआईएम/
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