प्रयागराज में ऐतिहासिक ‘भोर की चौकी’ का भव्य आयोजन, देखने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

प्रयागराज, 18 अक्टूबर . धर्म और आस्था की नगरी प्रयागराज में Sunday को पूरे विश्व में एकलौती ऐतिहासिक ‘भोर की चौकी’ का आयोजन किया गया. इस बार चांदी की जड़ित रत्न की चौकी Sunday भोर में चौक पहुंची तो पूरा वातावरण भक्तिमय रहा.

पुराने शहर चौक, लोकनाथ चौराहा, रानीमंडी की सड़कों पर यह भव्य शोभायात्रा शुरू हुई. इस दौरान नजारा देखने लायक था. भोर की पहली किरण के साथ भगवान के अनोखे स्वरूपों के दर्शन करना भक्तों के लिए एक अलौकिक अनुभव होता है.

इस परंपरा में चांदी के रथ की चौकी और चांदीकटोरे की चौकी के अलावा पत्थरचट्टीरामलीला कमेटी की बड़ी जड़ाऊ की चौकी की अलग विशेषताएं होती हैं. भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के स्वरूपों को चांदी और रत्नों से जड़ित ऐतिहासिक सिंहासनों और रथों पर विराजमान किया जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि जब पूरे देश में लोग भोर में गहरी नींद होते हैं तो प्रयागराज जैसे शहर में 4 बजे भोर में यहां पैर रखने तक की जगह नहीं होती है.

बेशकीमती रत्न इस ‘भोर की चौकी’ में जड़े थे. दूरदराज से आए कलाकार ने इस पूरी चौकी को तैयार किया था. पंजवा रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष सचिन गुप्ता ने बताया कि कुशल कारीगर इस चौकी को पिछले एक महीने से लगातार तैयार कर रहे थे. Sunday को भोर में भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा.

एक दर्शक सुनील यादव ने कहा कि प्रयागराज में भोर की चौकी काफी मशहूर है. यहां बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं. यहां हर दिन भक्तिमय माहौल रहता है और मंदिरों में लोग सुबह से ही दर्शन करने पहुंचते हैं.

Lucknow की निवासी रजनी ने से कहा कि हमें ‘भोर की चौकी’ देखकर अच्छा लगा है. यह ऐसी परंपरा है, जो पूरे विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलती है.

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डीसीएच/