
गुवाहाटी, 3 अक्टूबर . असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने Saturday को कहा कि जागीरोड में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा केंद्र में फर्स्ट ‘क्लीन रूम’ बनकर तैयार हो गया है और पायलट चिप का प्रोडक्शन शुरू हो गया है. यह राज्य के महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के लिए एक अहम उपलब्धि है.
सीएम सरमा ने कहा कि इस सुविधा का औपचारिक उद्घाटन Prime Minister Narendra Modi द्वारा दिसंबर या जनवरी में किए जाने की संभावना है.
Chief Minister ने कहा, “सेमीकंडक्टर सुविधा के संबंध में मैं कुछ दिन पहले आया था. क्लीन रूम पहले से ही तैयार है. उन्होंने पायलट चिप्स का उत्पादन शुरू कर दिया है.”
सरमा के अनुसार, इस सुविधा में दो क्लीन रूम होंगे, जबकि पहले वाले का काम पूरा हो चुका है, और दूसरे का निर्माण कार्य अभी चल रहा है.
इस परियोजना को India के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए सीएम सरमा ने कहा कि यह सुविधा ‘दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा’ होगी.
यह सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा मोरीगांव जिले के जागीरोड में लगभग 27,000 करोड़ रुपए के निवेश से विकसित की जा रही है.
पूरी तरह से चालू होने पर इस प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 48 मिलियन सेमीकंडक्टर चिप्स तक होगी.
इस सुविधा में उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें वायर बॉन्डिंग, फ्लिप चिप और इंटीग्रेटेड सिस्टम पैकेजिंग शामिल हैं.
इस सुविधा में उत्पादित चिप्स से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, संचार और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि इस सुविधा के औपचारिक उद्घाटन में देश भर की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है.
इस प्रोजेक्ट को फरवरी 2024 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत मंजूरी दी गई थी और इसे India के घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बनाने की कोशिशों के एक अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है.
केंद्र Government ने असम की इस सुविधा को देश की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग यूनिट बताया है, जिसका मकसद भारतीय और ग्लोबल दोनों बाजारों की जरूरतों को पूरा करना है.
असम के इंडस्ट्रियल बेस को मजबूत करने के अलावा, इस प्रोजेक्ट से इलाके में बड़े पैमाने पर रोज़गार के मौके पैदा होने की भी उम्मीद है.
सरकारी अनुमानों के मुताबिक, इस सुविधा और इससे जुड़े इकोसिस्टम से लगभग 27,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हो सकती हैं.
इस घटनाक्रम को पूर्वोत्तर में टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभरने की असम की उम्मीदों को एक बड़ा बढ़ावा देने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
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डीकेपी/
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