‘प्रदर्शन का अधिकार दूसरे की आजीविका छीनने का लाइसेंस नहीं’, कैट ने राहुल से पूछे सवाल, ‘धिक्कार दिवस’ मनाने का ऐलान

New Delhi, 5 नवंबर . अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर पिछले एक महीने से दिल्ली में Political रैलियों, धरनों और प्रदर्शनों के कारण बार-बार बाधित हो रही व्यापारिक गतिविधियों पर देशभर के व्यापारियों की गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त की है. विशेष रूप से 1 नवंबर की रैली और पिछले एक महीने से विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों को कांग्रेस और अन्य Political दलों की ओर से दिए जा रहे समर्थन पर कैट ने गंभीर सवाल उठाए हैं.

कैट ने घोषणा की है कि वो राहुल गांधी के जवाब का इंतजार करेगा, लेकिन दिवाली के तुरंत बाद दिल्ली सहित देशभर के नेता दिल्ली में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बैठक कर इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय करेंगे, क्योंकि अब यह सिर्फ दिल्ली के व्यापारियों का मामला नहीं है. आज अगर दिल्ली में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, तो कल देश के किसी भी अन्य शहर में भी ऐसा हो सकता है. इसलिए यह एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है और देश का व्यापारी इतना कमजोर नहीं है क वो इस प्रकार की स्थिति को अब बर्दाश्त करेगा. अब सबक सिखाने का समय आ गया है. कैट ने इस मुद्दे पर देश भर में ‘धिक्कार दिवस’ मनाने की घोषणा की है जिसकी तारीख New Delhi की बैठक में तय की जाएगी.

पत्र में कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने राहुल गांधी और कांग्रेस की Political व नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके समर्थन से आयोजित प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजधानी की आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जबकि यह समय देश के लिए महत्वपूर्ण त्योहारी एवं विवाह खरीदारी का मौसम है.

भरतिया ने कहा, “राहुल गांधी एक साथ दो विरोधाभासी बातें नहीं कर सकते. एक ओर वे लोगों से स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील करते हैं और दूसरी ओर ऐसे Political कार्यक्रमों व प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं, जिनके कारण ग्राहक उन्हीं बाजारों तक नहीं पहुंच पाते. यह केवल Political विरोधाभास नहीं, बल्कि ऐसा दोहरा रवैया है जिससे सीधे तौर पर आम व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होती है.”

Political नेताओं की ओर से संवैधानिक अधिकारों की चुनिंदा व्याख्या किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भरतिया ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ए) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, वहीं अनुच्छेद 19(1)(जी) प्रत्येक नागरिक को कोई भी व्यवसाय, व्यापार अथवा पेशा करने का अधिकार भी सुनिश्चित करता है.

भरतिया ने तीखे शब्दों में कहा, “क्या राहुल गांधी मानते हैं कि प्रदर्शन करने का अधिकार, व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से बड़ा है? क्या संविधान का अनुच्छेद 19(1)(जी) केवल भाषण देने और किताबों में लिखने के लिए है, या यह उन करोड़ों छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और कामगार परिवारों के अधिकारों की भी रक्षा करता है, जिनकी रोजी-रोटी उनकी दैनिक कमाई पर निर्भर है? Political नेता संविधान के प्रावधानों का अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हुए दूसरों के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकते.”

भरतिया ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को एक सीधे सवाल का जवाब देना चाहिए कि इन प्रदर्शनों के कारण जिन व्यापारियों और कामगार परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या कांग्रेस की राजनीति में ऐसी कोई व्यवस्था है जिसके तहत बाधा उत्पन्न करने वाले प्रदर्शनों के आयोजक और समर्थक उनके कारण हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं? अथवा Political शक्ति प्रदर्शन के लिए आम नागरिकों की आजीविका को बलि चढ़ाना स्वीकार्य मान लिया गया है?

कैट ने राहुल गांधी के समक्ष पांच सवाल रखे. संगठन ने पूछा, “क्या प्रदर्शन करने का अधिकार, व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है? क्या राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारिक जीवन को बंधक बनाना Political और नैतिक रूप से उचित है? प्रभावित व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? जब राहुल गांधी लोगों से स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की अपील करते हैं, तो उन्हीं बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच रोकने वाले प्रदर्शनों का समर्थन कैसे कर सकते हैं?”

इसके अलावा, कैट ने सवाल किया, “क्या कांग्रेस पार्टी और उसके Political सहयोगी उन प्रदर्शनों के कारण उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, जिनका वे समर्थन कर रहे हैं? अगर इसी प्रकार लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों से स्वयं राहुल गांधी के व्यापार, आजीविका अथवा दैनिक कमाई पर असर पड़ता, तो क्या वे इसे स्वीकार करते?”

अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि Political दलों को यह समझना होगा कि दिल्ली केवल Political शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं है, बल्कि देश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक व आर्थिक केंद्र भी है. दिल्ली के बाजार करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं और देश की अर्थव्यवस्था तथा सरकारी राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

भरतिया ने कहा, “देश के व्यापारी किसी के Political संघर्ष के पंचिंग बैग नहीं हैं. वे देश की घरेलू अर्थव्यवस्था की रीढ़, रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण आधार और राष्ट्र निर्माण के भागीदार हैं. वे कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे, बल्कि केवल अपने संवैधानिक अधिकारों के सम्मान की अपेक्षा करते हैं. राहुल गांधी को समझना चाहिए कि Government का Political विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन Political विरोध के नाम पर किसी दूसरे की आजीविका बर्बाद करना न तो लोकतंत्र है और न ही जिम्मेदार Political नेतृत्व.”

बीसी भरतिया ने कहा कि हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी केवल हमारे पत्र का जवाब ही नहीं देंगे, बल्कि आत्मचिंतन भी करेंगे और भविष्य में ऐसी अनावश्यक आर्थिक बाधाएं उत्पन्न न हों, यह सुनिश्चित करेंगे. राहुल गांधी का जवाब मिलने के बाद दिवाली के उपरांत दिल्ली के व्यापारियों एवं देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारिक नेताओं की New Delhi में एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी.

कैट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी को भी दूसरे नागरिक के व्यापार, रोजगार और आजीविका को बाधित करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता.

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डीसीएच/