प्रदर्शनकारियों की हिरासत पूरी तरह गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक: अभिषेक मनु सिंघवी

New Delhi, 11 अक्टूबर . कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को पूरी तरह से गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक करार दिया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है और विशेष सुरक्षा उपायों के नाम पर इसे नहीं रोका जा सकता. सिंघवी ने कहा कि यह कार्रवाई पहले से ही और रोकथाम के उद्देश्य से की गई है, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कुछ भी गलत नहीं किया है.

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी से जब पूछा गया कि क्या प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना कानूनी था तो उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक है. उनका कुछ भी गलत करने का सवाल नहीं है. यह पहले से ही रोकथाम के लिए है. यह गांधीवादी तरीके से शांति से विरोध करने के बुनियादी अधिकार का पूरी तरह से हनन है. आप बहुत खास सुरक्षा उपायों के नाम पर ऐसा नहीं कर सकते.”

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह सब एक चल रहे कैंपेन का हिस्सा है. यह राज्य के सभी अंगों के प्रमुख का ध्यान इस ओर खींचने के लिए है कि हमारे हिसाब से लोकतंत्र की नींव पर क्या असर पड़ रहा है. जहां तक Supreme Court की बात है, इसमें कुछ भी Political नहीं है. यह सिर्फ एक खास नजरिया पेश करने के बारे में है, जिसे हम राज्य का एक जरूरी अंग, यानी न्यायपालिका मानते हैं.

एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय में कहा गया है कि अनुच्छेद 121 उत्पीड़नकारी नहीं है. यह कंपनियों में एक सामान्य प्रथा है, जहां निवेशक अपने हितों की सुरक्षा के लिए सकारात्मक मत का प्रावधान रखते हैं, जो वस्तुतः निषेधाधिकार का ही दूसरा रूप है. अर्थात, जब तक हमारा मत प्राप्त न हो, तब तक आप कोई निर्णय नहीं ले सकते.

उन्होंने कहा कि इसमें एक और वाक्य महत्वपूर्ण है. छह टाटा ट्रस्टों में से दो कंपनियां हैं. दो का बहुमत दो होता है. इसे समझने में मुझे भी एक मिनट लगा. यदि केवल एक व्यक्ति मतदान करता है और दो नहीं, तो लिखित नियम के अनुसार, वह मत इस विषय को आगे नहीं बढ़ा सकता. यहां केवल मतदान की बात है.

कांग्रेस सांसद ने कहा कि इससे एक उल्लेखनीय बात सामने आती है, जिसे सुनकर पहले आश्चर्य होता है कि यदि वह मत विषय को आगे नहीं बढ़ा सकता तो इसका निर्णय सक्रिय अध्यक्ष के निर्णायक मत से होता है. उनकी कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि वे उस ट्रस्ट का हिस्सा नहीं हैं, वे मतदान समूह का भी हिस्सा नहीं हैं. यही समस्या है.

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डीकेपी