
सियोल, 3 सितंबर . दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने Thursday को कहा कि दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिशें जारी रखेगा. उन्होंने प्योंगयांग के साथ फिर से बातचीत करने की अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा का भी जिक्र किया.
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ‘कोरिया नेशनल डिप्लोमैटिक एकेडमी’ द्वारा आयोजित ‘सोल डिप्लोमेसी फोरम 2026’ में ‘बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक शासन’ विषय पर अपने मुख्य भाषण के दौरान चो ने ये बातें कहीं.
चो ने कहा, “हम अमेरिका और डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के बीच बातचीत फिर से शुरू करने के लिए अपनी राजनयिक कोशिशें जारी रखेंगे.” उन्होंने उत्तर कोरिया का जिक्र उसके आधिकारिक नाम ‘डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (डीपीआरके) से किया.
उन्होंने कहा, “इस संबंध में, हम कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बनाए रखने में President ट्रंप की लगातार दिलचस्पी और डीपीआरके के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की उनकी इच्छा पर ध्यान दे रहे हैं, जैसा कि उनके हालिया संदेशों से पता चलता है.”
पिछले महीने, ट्रंप ने इस साल के आखिर में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मिलने की इच्छा जताई थी. साथ ही, किम के साथ अपने “बहुत अच्छे” संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच होने वाले एक बड़े सैन्य अभ्यास को कम करने का आदेश भी दिया था.
मंत्री ने कहा, “हमें यह भी उम्मीद है कि ऐसी बातचीत से कोरियाई प्रायद्वीप में पूरी तरह परमाणु-निरस्त्रीकरण और स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा.”
चो ने उत्तर कोरिया के साथ सीधे संबंध बेहतर बनाने की सोल की कोशिशों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्योंगयांग द्वारा सोल की शांति की पहल का कोई जवाब न देने के बावजूद Government अंतर-कोरियाई बातचीत फिर से शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है.
मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि दक्षिण कोरिया को अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि वह अपने गठबंधन और व्यापक साझेदारियों में एक अहम और मूल्यवान सहयोगी के तौर पर अपनी जगह बना सके.
चो ने कहा, “हम इस गठबंधन को भविष्य की आवश्यकताओं के हिसाब से एक व्यापक साझेदारी में बदलने के लिए काम कर रहे हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “हम पारंपरिक सुरक्षा से आगे बढ़कर ऐसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं जहां कोरिया अपना खास योगदान दे सकता है. ये क्षेत्र नागरिक परमाणु गतिविधियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और जहाज निर्माण हैं.”
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केआर/
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