
Mumbai , 29 अक्टूबर . फिल्म ‘पेड्डी’ में Actress जाह्नवी कपूर के किरदार को दिखाए जाने के तरीके को लेकर काफी चर्चा हुई. हाल ही में वरुण धवन के साथ ‘कॉफी विद करण’ में शामिल होने के दौरान, उन्होंने इस स्पोर्ट्स ड्रामा में अपने किरदार को ‘ऑब्जेक्टिफाई’ किए जाने को लेकर हुई आलोचना पर खुलकर बात की.
आलोचना को खारिज करने या चर्चा से बचने के बजाय, जाह्नवी ने इस मामले को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि उनके किरदार को लेकर हुई चर्चा से शायद अब उन अभिनेत्रियों के प्रति अधिक संवेदनशीलता आएगी, जो अपने चित्रण के कुछ पहलुओं को लेकर असहज महसूस करती हैं.
जाह्नवी ने कहा, “मुझे खुशी है कि ‘पेड्डी’ में मेरे चित्रण को लेकर इतना बड़ा मुद्दा बना. शायद अगली बार जब कोई Actress कहेगी कि वह असहज है, तो लोग उसे किसी एलियन की तरह नहीं देखेंगे.”
इस विषय पर बात करते हुए, जाह्नवी ने बताया कि वह इस मुद्दे पर बोलने में थोड़ी हिचकिचा रही थीं, क्योंकि इस प्रोजेक्ट पर कई लोगों ने कड़ी मेहनत की थी.
‘धड़क’ फेम Actress ने कहा, “मुझे सच में समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं या कुछ कहना भी चाहिए या नहीं, लेकिन यह जरूरी था कि जो कुछ भी हुआ, उसमें अपनी जिम्मेदारी मैं खुद लूं. मेरे मन पर इस बात का भारी बोझ था कि इस तरह की चीजों का हमारे समाज पर, खासकर महिलाओं पर, कितना नकारात्मक असर पड़ सकता है.”
जाह्नवी ने माना कि समाज पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर वह शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि वह थोड़ी और सतर्क रह सकती थीं.
उन्होंने कहा, “क्या मैं कुछ और कर सकती थी? क्या मैं और ज्यादा सतर्क रह सकती थी? क्या मैं इस पर कड़ा विरोध जता सकती थी? बिल्कुल, हां. क्या यह समस्याजनक था? क्या यह हद से ज्यादा ‘ऑब्जेक्टिफिकेशन’ था? क्या इसने एक तरह से यौन उत्पीड़न को भी बढ़ावा दिया? हां.”
Actress ने बताया कि उन्होंने कई बार खुद से यह सवाल पूछा कि क्या उन्हें शूटिंग के दौरान और अधिक मजबूती से विरोध करना चाहिए था.
उन्होंने कहा, “मैं यह कहना नहीं चाहती, क्योंकि ऐसा लग सकता है कि मैं अपना दोष दूसरों पर डाल रही हूं, लेकिन आप जानते हैं कि चीजें कैसे काम करती हैं. हां, डायरेक्टर जो कहते हैं, आपको प्रोफेशनल बने रहना होता है और उनकी बात माननी पड़ती है.’ इसलिए, जैसे-जैसे मुझे चीजें पता चलती गईं, मैं अपनी समझ के हिसाब से यही कोशिश कर रही थी कि चीजों को कम से कम समस्याजनक बनाया जा सके.”
–
डीके/एबीएम
Skip to content