पेंटागन ने सैनिकों के टेस्टोस्टेरोन की जांच के लिए दिए आदेश

वॉशिंगटन, 18 सितंबर . पेंटागन ने 30 साल और उससे अधिक उम्र के अमेरिकी सैन्य कर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच लागू करने के लिए नई क्लिनिकल गाइडलाइंस जारी की हैं. साथ ही, इलाज के लिए सीमाएं तय की हैं और सिर्फ परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए इस हार्मोन का इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी दी है.

डिफेंस हेल्थ एजेंसी ने 17 सितंबर को गाइडेंस जारी की. यह जुलाई के उस निर्देश के तहत पुरुष सर्विस सदस्यों के लिए एक जैसी स्क्रीनिंग और इलाज की प्रक्रिया तय करती है, जिसमें एक्टिव-ड्यूटी और रिजर्व कर्मचारी शामिल हैं. 30 साल से कम उम्र के लोग स्क्रीनिंग के लिए अनुरोध कर सकते हैं.

पेंटागन ने इस पहल को युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता से जोड़ा है. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “विभाग एक ऐसी तैयार और घातक लड़ाकू सेना बनाने और बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो युद्ध के मैदान में दबदबा बनाने और ताकत के दम पर शांति हासिल करने के लिए तैयार हो.”

हालांकि, क्लिनिकल दस्तावेज में पुष्टि की गई कमी के इलाज और युद्ध के मैदान में बेहतर प्रदर्शन के लिए टेस्टोस्टेरोन देने के बीच स्पष्ट अंतर बताया गया है.

बयान में कहा गया है, “मौजूदा सबूतों के आधार पर किसी बीमारी या कमी के इलाज के बजाय प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर आधारित गाइडेंस का समर्थन नहीं किया जा सकता है.”

गाइडलाइन के अनुसार, स्क्रीनिंग की शुरुआत लक्षणों और जोखिम वाले कारकों के व्यवस्थित मूल्यांकन से होती है. यदि यह मूल्यांकन पॉजिटिव आता है या कोई जोखिम कारक मौजूद होता है, तो इसके बाद ब्लड टेस्ट किया जाता है. स्क्रीनिंग की आवश्यकता का मतलब यह नहीं है कि हर सर्विस मेंबर को अपने आप हार्मोन ट्रीटमेंट मिल जाएगा.

डायग्नोसिस के लिए लगातार कम टेस्टोस्टेरोन लेवल और उससे जुड़े लक्षणों का होना जरूरी है. केवल लैब में कम रीडिंग आना या केवल लक्षण होना ही काफी नहीं है.

गाइडलाइन में अलग-अलग दिनों में खाली पेट सुबह के समय दो ब्लड सैंपल लेने की बात कही गई है. इसमें आगे की टेस्टिंग का भी प्रावधान है, यदि टोटल टेस्टोस्टेरोन रीडिंग नॉर्मल रेंज में होने के बावजूद लक्षण बने रहते हैं.

लक्षणों में सेक्स की इच्छा में कमी, ऊर्जा में कमी, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, मांसपेशियों के द्रव्यमान (मसल मास) में कमी और उदास मन-स्थिति शामिल हो सकते हैं. डॉक्यूमेंट में चेतावनी दी गई है कि ये लक्षण नींद की कमी, मानसिक तनाव, अपर्याप्त कैलोरी सेवन और मिलिट्री सर्विस में आम अन्य स्थितियों से भी जुड़े हो सकते हैं.

गाइडलाइन में बताए गए मिलिट्री सर्विलांस रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2018 और 2025 के बीच हर साल 1 प्रतिशत से भी कम पुरुष सर्विस मेंबर में एक्टिव क्लिनिकल डायग्नोसिस पाया गया.

डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से सेक्सुअल फंक्शन, शरीर की बनावट और बोन मिनरल डेंसिटी में फायदे देखे गए हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि ऊर्जा, जीवन-शक्ति, शारीरिक कार्यक्षमता या सोचने-समझने की क्षमता (कॉग्निशन) को बेहतर बनाने के लिए इसके इस्तेमाल का समर्थन करने वाले सबूत नहीं हैं.

साथ में दी गई मरीजों के लिए जानकारी वाली शीट से यह साफ होता है कि इलाज करवाना एक विकल्प है.

डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “जांच या इलाज न करवाने पर कर्मचारी को किसी तरह के बुरे नतीजे का सामना नहीं करना पड़ेगा.”

थेरेपी से जिनकी हालत स्थिर है, उन्हें आम तौर पर बिना किसी विशेष छूट (वेवर) के तैनाती के लिए भेजा जा सकता है, बशर्ते दवा का प्रकार ऐसा हो. इलाज करने वालों को तैनाती की अवधि और उसके बाद के 90 दिनों के लिए पर्याप्त दवा का इंतजाम करना होगा, या फिर दोबारा दवा सप्लाई करने की योजना का रिकॉर्ड रखना होगा. खास तरह की ड्यूटी के लिए अलग नियम लागू रहेंगे.

ओपी/एएस