
New Delhi, 13 अक्टूबर नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर एक पूर्वोत्तर India में उच्चस्तरीय चर्चा आयोजित की जाएगी. इस चर्चा व बैठक के लिए 15 अक्टूबर को गुवाहाटी में विशेष संयुक्त राज्य प्रतिनिधि एवं अपर महानिदेशक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. बैठक का उद्देश्य पूर्वोत्तर के राज्यों में एनसीसी की गतिविधियों को बढ़ाना और उसके कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना है.
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में एनसीसी से जुड़ी चुनौतियों और संगठन को मजबूत बनाने के उपायों पर संवाद होगा.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह आयोजन एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स के नेतृत्व में होने जा रहा है. इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय, एनसीसी और संबंधित राज्यों की Governmentों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे. सम्मेलन में एनसीसी के विस्तार, कैडेटों के कल्याण, प्रशिक्षण व्यवस्था, संस्थागत मजबूती और प्रशासनिक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इसके साथ ही एनसीसी और राज्य Governmentों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर रहेगा.
दोनों पक्ष मिलकर ऐसी पहल तलाशेंगे, जिनसे अधिक युवाओं तक एनसीसी की पहुंच बढ़े और उसकी गतिविधियों का प्रभाव व्यापक हो.
बता दें कि एनसीसी युवाओं में अनुशासन, जिम्मेदारी और नेतृत्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह संगठन सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से समाज के प्रति युवाओं की भागीदारी भी बढ़ाता है. देश के 99 प्रतिशत से अधिक जिलों में उपस्थिति के साथ एनसीसी युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है.
इसका संचालन केंद्र और राज्य Governmentों की साझा जिम्मेदारियों के तहत होता है. गुवाहाटी में होने वाला यह सम्मेलन विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में एनसीसी की पहुंच, प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा. इसी वर्ष मानसून के दौरान एनसीसी कैडेट्स ने बाढ़ राहत में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.
सेना के मुताबिक 16 से 18 अगस्त तक असम के बरहोइटिंग, चिंतामणि घर और निमाईजान में विशेष मेडिकल अभियान आयोजित किए गए. इसमें स्थानीय एनसीसी कैडेटों और गैर-सरकारी संगठनों ने सेना के साथ कंधे से कंधे मिलाकर काम किया था.
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जीसीबी/डीकेपी
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