पुस्तैनी घर तोड़े जाने से पहले सीएम मोहन यादव ने की पूजा-अर्चना, बोले-इसका कोई मुआवजा नहीं लेंगे

उज्जैन, 27 सितंबर . सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के तहत Chief Minister मोहन यादव और उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा रास्ते में आ रहा है. Sunday को उनका घर तोड़ा जाएगा. Chief Minister मोहन यादव ने तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले वहां जाकर अपने पैतृक घर में पूजा-अर्चना की.

अपने पुश्तैनी घर के बारे में बातचीत करते हुए Chief Minister मोहन यादव ने कहा, “जब मैंने 1982 में साइंस कॉलेज से अपना पहला चुनाव जीता (चाहे वह जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव हो, प्रेसिडेंट का चुनाव हो या विधायक का चुनाव) और उसके बाद मैंने जितने भी चुनाव लड़े, उन सभी का गवाह यह इलाका और यह घर रहा है. यह भी सही है कि अगर हम नेता बने हैं तो खुद उदाहरण बनना चाहिए. मेरी ओर से उज्जैनवासियों को बधाई.”

Chief Minister मोहन यादव ने कहा, “यह सच है कि हर किसी की एक जगह होती है जहां वे रहते हैं, पैदा होते हैं और अपना बचपन और जवानी बिताते हैं. हालांकि अगर समाज के लिए जरूरी हो, तो हमारे माता-पिता ने हमें ऐसी चीजों के लिए तैयार रहने के संस्कार दिए हैं. उज्जैन में यह आदर्श उदाहरण है कि लोग स्वेच्छा से अपने मकान को पीछे हटा रहे हैं. हमारे शहर की आबादी 8 लाख है लेकिन जब दुनियाभर से 30-40 करोड़ लोग यहां आएंगे तो किसी को कष्ट न हो इसके लिए हम अपनी तरफ से योगदान दें. उज्जैनवासियों के साथ मैं भी इस प्रक्रिया में शामिल हूं.”

सीएम मोहन यादव ने कहा, “यह मकान पिताजी ने अपनी मेहनत से बनाया था, जब हम आंख भी नहीं खोले थे तब से यह मकान है और इससे एक लगाव है. वहीं, इस बात की प्रसन्नता है कि पूरे समाज के साथ पूरे मोहल्ले के लोग अपने-अपने आशियानों को तोड़ रहे हैं. इससे पूरे उज्जैन में बड़ा अच्छा संदेश जा रहा है. मैं अपनी पार्टी को भी धन्यवाद देता हूं.”

Chief Minister ने कहा, “बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों ने अपने-अपने देवस्थान को पीछे हटाया और स्वेच्छा से इस पूरे अभियान का हिस्सा बने हैं. इसी से Government के प्रति लोगों का विश्वास बनता है. Prime Minister को भी धन्यवाद देना चाहूंगा, जिनकी वजह से राज्य में ऐसे बड़े-बड़े निर्णय हो पा रहे हैं. घर से बचपन की यादें जुड़ी हैं, थोड़ा भावुक क्षण है. इसके लिए माफी लेकिन कर्तव्य की वेदी पर हमें खुद को इन सारी बातों के लिए दृढ़ता से तैयार रखना चाहिए. हम सब इस बात के लिए तैयार हैं कि हमारे अपने ‘अवंतिका’ में लाखों वर्षों से आतिथ्य की परंपरा रही है. हम अपने घर का कोई मुआवजा नहीं लेंगे, इसकी जरूरत नहीं है. यह हमारी अपनी जिम्मेदारी है.”

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एसडी/पीएम