
New Delhi, 20 सितंबर . India और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस एयर-टू-सर्फेस मिसाइल प्रणाली खरीदने में मलेशिया की दिलचस्पी उसकी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिका और अमेरिका समर्थक देशों पर निर्भरता कम कर सकती है.
दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक परामर्श कंपनी एशिया ग्रुप एडवाइजर्स में मलेशिया के एसोसिएट डायरेक्टर कमलेश कुमार ने कहा कि India के साथ करीबी सहयोग मलेशिया को बिन किसी एक खेमे में स्पष्ट रूप से शामिल हुए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सुरक्षा साझेदार प्रदान करता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि India मलेशिया के रक्षा साझेदारों की सूची में एक महत्वपूर्ण नया सहयोगी बन सकता है. मलेशिया के Prime Minister अनवर इब्राहिम ने New Delhi में Prime Minister Narendra Modi से मुलाकात के बाद ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में रुचि जताई थी.
कमलेश कुमार के अनुसार, रक्षा साझेदारियों में विविधता लाने का उद्देश्य रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना भी है. उन्होंने आगाह किया कि यह कदम चीन की चिंता बढ़ा सकता है.
उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता और बहुउद्देश्यीय उपयोगिता को देखते हुए दक्षिण चीन सागर में मलेशिया की प्रतिरोधक क्षमता (डिटरेंस) को लेकर धारणा प्रभावित हो सकती है. दक्षिण चीन सागर वह क्षेत्र है, जहां चीन और मलेशिया दोनों अपने-अपने दावे करते हैं.
उन्होंने कहा कि यदि मलेशिया इस प्रणाली का अधिग्रहण करता है तो उसे स्पष्ट रूप से बताना होगा कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि किसी विशेष देश को निशाना बनाना.
रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशियाई Prime Minister अनवर इब्राहिम 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए New Delhi आए थे, जहां मलेशिया ने एक साझेदार देश के रूप में हिस्सा लिया. इसके बाद उन्होंने India का दौरा जारी रखते हुए दोनों देशों के बीच निवेश और पूंजी प्रवाह बढ़ाने की वकालत की.
सनवे यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर याह किम लेंग ने कहा कि India और मलेशिया के बीच आर्थिक संबंध अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में मलेशिया और India के बीच व्यापार 79.3 अरब रिंगिट का रहा, जो अमेरिका और चीन के साथ उसके 900 अरब रिंगिट से अधिक के व्यापार की तुलना में काफी कम है. यह स्थिति तब है, जब दोनों देशों ने 2024 में एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
कुआलालंपुर स्थित रणनीतिक सलाहकार फर्म डेंसुई के साझेदार एरिक लो ने कहा कि India के साथ संबंध मजबूत करने का मतलब चीन या अमेरिका से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि मलेशिया के आर्थिक और रणनीतिक विकल्पों का विस्तार करना है. उनके अनुसार, यह कदम दीर्घकालिक दृष्टि से मलेशिया की स्थिति को और मजबूत कर सकता है.
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