
Bhopal , 10 अक्टूबर . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की Madhya Pradesh इकाई ने हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर मिली हार के लिए पूर्व Chief Minister कमलनाथ की अपर्याप्त तैयारी को जिम्मेदार ठहराया है. भाजपा ने कहा कि Chief Minister मोहन यादव की Government ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए इस आदेश की समीक्षा करेगी.
Madhya Pradesh भाजपा के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, “जो भी गलतियां हुई हैं, उनका पूरा दोष कांग्रेस और कमलनाथ पर जाता है. उस समय 2019 में कमलनाथ की Government सत्ता में थी और कमलनाथ इसे बिना किसी पूर्व तैयारी के लाए थे, और आज Madhya Pradesh और पूरा पिछड़ा वर्ग समाज उस अधूरी तैयारी का खामियाजा भुगत रहा है.”
उन्होंने आरोप लगाए कि कांग्रेस पार्टी ने कभी ओबीसी समाज की चिंता नहीं की. 1955 में डीबी कालेलकर समिति बनी, चार-पांच दशकों तक कांग्रेस ने इस पर विचार ही नहीं किया. 2014 में Narendra Modi के नेतृत्व में भाजपा की Government बनने के बाद उस समिति की सिफारिशों को लागू किया गया और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया.
सुरेंद्र शर्मा ने यह भी कहा कि मंडल कमेटी की सिफारिशों को भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. जब केंद्र में वीपी सिंह के नेतृत्व में भाजपा के गठबंधन वाली Government थी, तब मंडल कमेटी की शर्तें लागू हुईं. इसलिए आरक्षण की चिंता हमने की. गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों की चिंता भाजपा ने की.
भाजपा उपाध्यक्ष ने कहा कि Madhya Pradesh को पिछड़े वर्ग के चार Chief Minister हमारी पार्टी ने दिए. कांग्रेस बताए कि क्या उसने कभी पिछड़ा वर्ग से कोई Chief Minister दिया. Himachal Pradesh में कांग्रेस की Government है, वहां सिर्फ 18 प्रतिशत आरक्षण है. इसलिए कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर है.
सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि निश्चित तौर पर हाईकोर्ट का निर्णय विपरीत आया है, लेकिन इसकी प्रति आने के बाद Government समीक्षा करेगी. हर वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा राज्य की मोहन यादव की Government करेगी.
बता दें कि जबलपुर हाईकोर्ट ने पिछले दिन राज्य में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े विवाद पर फैसला दिया. अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में ओबीसी के लिए आरक्षण 14 फीसदी ही रहेगा. कोर्ट ने कहा कि आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत करने के लिए ठोस कारण नहीं मिले, जिससे 50 प्रतिशत की सीमा पार करना जरूरी साबित हो.
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डीसीएच/
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