पाकिस्तान में बाल यौन शोषण मामलों में सजा की दर बेहद कम, बढ़ रहीं घटनाएं

इस्लामाबाद, 17 सितंबर . Pakistan में बाल यौन शोषण (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज) के मामलों में दोषियों को सजा मिलने की दर बेहद कम बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि कम सजा दर के कारण अपराधियों का हौसला बढ़ता है और ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan में हर कुछ हफ्तों में किसी बच्चे के साथ दुष्कर्म, हत्या या दोनों तरह की घटनाओं की खबर सामने आती है. हर घटना के बाद लोग गुस्सा जाहिर करते हैं, न्याय की मांग करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ जाता है. इसके कारण बच्चों की सुरक्षा, अपराध रोकथाम, दोषियों की जवाबदेही और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी है.

हाल ही में कराची में 18 महीने की बच्ची ऐजल की यौन उत्पीड़न के बाद मौत हो गई. Police के अनुसार, एक किशोर रिश्तेदार बच्ची को घर से ले गया था और बाद में उसे गंभीर हालत में वापस लाया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. इससे पहले अगस्त में पांच वर्षीय आयत नूर का शव एक कुएं से बरामद हुआ था. जांच में उसके साथ यौन उत्पीड़न की बात सामने आई थी.

बाल संरक्षण संस्था साहिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में Pakistan में बच्चों के खिलाफ उत्पीड़न के 1,914 मामले दर्ज किए गए. इनमें सड़क पर लावारिस हालत में मिले 49 नवजात और बच्चों के मामले भी शामिल हैं.

जनवरी से जून 2026 के बीच Pakistan में बाल यौन शोषण के 1,015 मामले, अपहरण के 558 मामले, लापता बच्चों के 101 मामले, यौन शोषण से जुड़े अश्लील सामग्री के 98 मामले और बाल विवाह के 35 मामले दर्ज किए गए.

यह रिपोर्ट Pakistan के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब, सिंध, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, Pakistan अधिकृत कश्मीर (पीओके) और Pakistan अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के समाचार पत्रों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल पीड़ितों में 58 प्रतिशत लड़कियां थीं.

पीड़ित बच्चों में 598 बच्चे 11 से 15 वर्ष आयु वर्ग के थे, 356 बच्चे 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के, 329 बच्चे 6 से 10 वर्ष आयु वर्ग के और 95 बच्चे 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के थे. वहीं 487 मामलों में पीड़ितों की उम्र का उल्लेख नहीं किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, 43 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित थे, जबकि 34 प्रतिशत मामलों में आरोपी अजनबी थे. कुल मामलों में 57 प्रतिशत घटनाएं शहरी क्षेत्रों और 43 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज की गईं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि Pakistan ने दोषियों के लिए सख्त सजा संबंधी कानूनी सुधार तो किए हैं, लेकिन जांच प्रक्रिया में सुधार और पीड़ितों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं.

विश्लेषण में कहा गया है कि बाल यौन शोषण मामलों में बेहद कम सजा दर अपराधियों को ऐसे अपराध जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करती है. कई मामलों में आरोपी लंबे समय तक कई बच्चों को निशाना बनाते रहते हैं और एक मामले की जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन से अन्य पीड़ितों से जुड़े सबूत मिलते हैं. इसके बावजूद लंबी न्यायिक प्रक्रिया और कमजोर फॉलो-अप के कारण बहुत कम मामलों में सजा हो पाती है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि न्यायिक कमजोरियों के अलावा गरीबी, बाल श्रम, कम उम्र में विवाह और असुरक्षित सामाजिक माहौल जैसी परिस्थितियां भी बच्चों को शोषण और उत्पीड़न के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं. इन्हीं कारणों से Pakistan में बच्चों के खिलाफ अपराधों की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है.

एएमटी/डीकेपी