पाकिस्तान के सुरक्षा संकट में नया मोड़, एक्यूआईएस की एंट्री से टीटीपी के खिलाफ लड़ाई हुई और जटिल

New Delhi, 2 अक्टूबर . अल-कायदा इन द सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) के Pakistan के सुरक्षा परिदृश्य में सक्रिय रूप से उतरने से इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ गई हैं. Pakistan पहले से ही तहरीक-ए-तालिबान Pakistan (टीटीपी), बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में एक्यूआईएस का टीटीपी के साथ खड़ा होना वहां के सुरक्षा हालात में एक नया आयाम जोड़ रहा है.

जानकारी के मुताबिक, अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है, लेकिन इस बार इसका केंद्र अफगानिस्तान के बजाय Pakistan बन गया है. एक्यूआईएस अब तक Pakistan और अफगानिस्तान में किसी अभियान को अंजाम देने से दूर रहा था और पर्दे के पीछे से घटनाक्रम पर नजर रख रहा था. बताया जा रहा है कि Pakistan द्वारा टीटीपी और बीएलए के खिलाफ इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आई ) को इस्तेमाल करने की कोशिश के बाद एक्यूआईएस ने भी इस संघर्ष में उतरने का फैसला किया.

एक अधिकारी के अनुसार, एक्यूआईएस के कई सदस्य Pakistan में मौजूद हैं. अमेरिका की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में अफगानिस्तान से बाहर किए जाने के बाद ये सदस्य Pakistan के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए थे. पिछले कई वर्षों से एक्यूआईएस का मुख्य फोकस डिजिटल प्रचार और नए सदस्यों की भर्ती पर रहा है. अधिकारी का कहना है कि लंबे अंतराल के बाद संगठन ने अब प्रत्यक्ष रूप से इस संघर्ष में शामिल होकर Pakistanी प्रतिष्ठान को चुनौती देने का फैसला किया है.

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि एक्यूआईएस अपने संदेश और प्रचार सामग्री अपने मीडिया विंग अल-सहाब मीडिया फाउंडेशन के जरिए जारी करता है. हाल के दिनों में इस मंच से Pakistanी प्रतिष्ठान के खिलाफ टीटीपी के अभियानों का खुलकर समर्थन किया गया है. साथ ही एक्यूआईएस के सदस्यों से टीटीपी के साथ मिलकर Pakistan के खिलाफ लड़ाई में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है.

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि Pakistan की सुरक्षा स्थिति पहले ही काफी चुनौतीपूर्ण है. टीटीपी के हमलों से Pakistanी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं बीएलए और बीएलएफ जैसे संगठनों ने भी Pakistan के सुरक्षा प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाया है.

अधिकारी के मुताबिक, बीएलएफ ने हाल में दावा किया कि उसके महिला दस्ते ने Pakistanी सुरक्षा बलों के खिलाफ अपना पहला हमला किया. बीएलए का भी एक महिला विंग है और खुफिया आकलनों में इसे एक खतरनाक इकाई बताया गया है.

टीटीपी, बीएलए और बीएलएफ के हमलों से नुकसान उठाने के बाद Pakistanी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और आई को भी अपने साथ जोड़ने का फैसला किया. इससे Pakistan की पहले से जटिल सुरक्षा स्थिति और उलझ गई. अधिकारियों के मुताबिक, इस घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि Pakistan अपने हितों के लिए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को साथ लेने को तैयार है.

क्षेत्र में पकड़ और विस्तार के मामले में एक्यूआईएस की गति आई की तुलना में धीमी रही है. बताया जाता है कि एक्यूआईएस के कैडर लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाने की मांग कर रहे थे और शीर्ष नेतृत्व को संदेश दे रहे थे कि वे अब केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहते. आई के संघर्ष में उतरने के बाद एक्यूआईएस के शीर्ष नेतृत्व के रुख में बदलाव आया और संगठन के सदस्यों को सक्रिय होने की अनुमति दी गई.

अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई महीनों से अल-कायदा की प्रचार पत्रिकाओं में टीटीपी को केवल नैतिक समर्थन दिया जा रहा था. अब स्थिति बदल गई है और एक्यूआईएस के सदस्य टीटीपी के Pakistanी सुरक्षा बलों, लश्कर और आई के खिलाफ अभियानों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं.

एक्यूआईएस के इस कदम से टीटीपी को भी फायदा मिलने की बात कही जा रही है. हालांकि क्षेत्र में एक्यूआईएस कमजोर हुआ है, लेकिन उसके पास लॉजिस्टिक्स और प्रशिक्षण का अनुभव मौजूद है. अल-कायदा ने ओसामा बिन लादेन के दौर से ही प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स से संबंधित कई मैनुअल तैयार किए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, टीटीपी को इस विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है और नए सदस्यों को युद्धक्षेत्र में भेजे जाने से पहले एक्यूआईएस द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने की बात सामने आई है.

Pakistan के लिए एक्यूआईएस की सक्रिय एंट्री एक अप्रत्याशित चुनौती के रूप में देखी जा रही है. एक अधिकारी के अनुसार, इस्लामाबाद को उम्मीद रही होगी कि एक्यूआईएस इस संघर्ष से दूर रहेगा, लेकिन अब उसके सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने से Pakistan के सामने स्थिति और अधिक जटिल हो गई है.

–

डीएससी