
New Delhi, 15 सितंबर . India और अमेरिका की सेनाएं एक बार फिर साथ मिलकर युद्ध कौशल और आधुनिक तकनीक की ताकत परख रही हैं. दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का 22वां संस्करण Tuesday को शुरू हुआ. इस बार इसकी खास बात यह है कि अभ्यास उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाके औली से लेकर Rajasthan के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक एक साथ चल रहा है.
औली में 14 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन ने जवानों से संवाद किया. वहीं अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने भी सैनिकों को संबोधित किया. अभ्यास में India और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं. इस अभ्यास में दोनों सेनाएं पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में एकीकृत युद्ध समूहों के संचालन की क्षमता को मजबूत करेंगी. खास तौर पर पैदल सेना आधारित अभियानों पर ध्यान दिया जाएगा. सैनिक अलग-अलग परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर अभियान चलाने की रणनीति और तकनीक का अभ्यास करेंगे.
‘युद्ध अभ्यास 2026’ में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में है. सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल करेंगे. वहीं, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा. दोनों सेनाओं के विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्धकला में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा करेंगे. इस दौरान रणनीति, तकनीक और संचालन प्रक्रियाओं को साझा किया जाएगा. इससे दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और संयुक्त अभियानों की क्षमता को और मजबूती मिलेगी.
इस बार अभ्यास में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा. Rajasthan के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा.
बता दें कि बीते महीने ही भारतीय और अमेरिकी नौसेना ने भी एक विशेष अभ्यास को अंजाम दिया था. इसके तहत समुद्र के भीतर छिपे विस्फोटक खतरों को खोजने और उन्हें निष्क्रिय करने का अभ्यास किया गया. दोनों देशों के नौसैनिक विशेषज्ञ एक साथ प्रशिक्षण लिया. India व अमेरिका की नौसेनाओं का यह ‘एक्सपलोसिव ऑर्डेनेंस डिस्पोजल’ (ईओडी) अभ्यास 10 से 14 अगस्त तक कोच्चि स्थित नौसेना की दक्षिणी कमान में आयोजित किया गया था.
इस अभ्यास में दोनों ही देशों के नौसैनिकों ने तकनीक और काम करने के अपने अपने तरीके साझा किए. अभ्यास के दौरान विशेषज्ञों के बीच चर्चा, संयुक्त प्रशिक्षण, उपकरणों का प्रदर्शन और अलग-अलग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों पर आधारित व्यावहारिक अभ्यास हुए.
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जीसीबी/डीकेपी
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