
श्रीनगर, 25 सितंबर . जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने Friday को विधानसभा में बताया कि पहलगाम में बन रहे 50 बेड वाले अस्पताल ब्लॉक का करीब 75 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. वहीं, बाकी कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है.
पहलगाम के विधायक अल्ताफ अहमद वानी के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 12 मार्च 2020 के सरकारी आदेश के तहत अस्पताल के निर्माण के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी. इस प्रोजेक्ट के लिए 19.90 करोड़ रुपए की लागत मंजूर की गई थी.
इस परियोजना में अस्पताल की इमारत के निर्माण के साथ सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और इससे जुड़े अन्य कार्य शामिल हैं.
मंत्री ने बताया कि परियोजना के लिए अब तक 16.75 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, जबकि 31 मार्च 2026 तक 10.53 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे. विभागीय विवरण के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक 33.31 लाख रुपए खर्च किए गए हैं.
मंत्री ने सदन को बताया कि परियोजना का काम संतोषजनक तरीके से आगे बढ़ रहा है और इसका लगभग 75 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. डीजी सेट को सफलतापूर्वक चालू कर सौंप दिया गया है. वहीं, लॉन्ड्री सिस्टम, सेंट्रल स्टेराइल सप्लाई डिपार्टमेंट (सीएसएसडी) और स्टेराइल टनल प्रोजेक्ट (एसटीपी) से जुड़े उपकरणों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन हो चुके हैं. फिलहाल, इन्हें चालू करने की प्रक्रिया चल रही है.
अस्पताल में लिफ्ट लगाने का काम भी जारी है. इसके अलावा बाकी मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल कार्यों को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
परियोजना में देरी के कारणों के बारे में मंत्री ने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान जगह की भौगोलिक स्थिति और जमीन के स्तर में अंतर के कारण एक अतिरिक्त बेसमेंट बनाना जरूरी हो गया था.
इससे अस्पताल का कुल निर्मित क्षेत्र बढ़ गया और अतिरिक्त स्ट्रक्चरल, आर्किटेक्चरल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और अन्य संबंधित कार्यों की जरूरत पड़ी. इससे परियोजना की लागत में संशोधन करना पड़ा.
उन्होंने बताया कि कोविड के बाद उपकरणों और उन्हें लगाने की लागत में बढ़ोतरी से भी परियोजना की लागत बढ़ी है. इसके लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं.
मंत्री ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से परियोजना की प्रगति की निगरानी कर रही हैं. परियोजना को पूरा करने में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के साथ समीक्षा बैठक भी की है.
उन्होंने बताया कि संशोधित प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है. स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, कश्मीर से संशोधित डीपीआर मिलने और उसकी जांच के बाद इसे मंजूरी दी जाएगी.
पहलगाम, सल्लर और ऐशमुकाम के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में अपग्रेड करने से जुड़े एक पूरक सवाल के जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. विभाग अभी मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत और बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहा है.
मंत्री ने आईपीएचएस-2022 के नियमों के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिन जिलों की आबादी पांच लाख से कम है और जहां एक जिला अस्पताल पहले से काम कर रहा है, वहां सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की जरूरत नहीं होती है. पांच से 10 लाख तक की आबादी वाले जिले में एक सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल हो सकता है. इसके अलावा हर अतिरिक्त 10 लाख की आबादी पर एक और सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल बनाने पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोगों को बेहतर सेकेंडरी हेल्थकेयर सेवाएं मिल सकें. इसके अनुसार, 20 लाख तक की आबादी वाले जिले में एक जिला अस्पताल और दो सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल हो सकते हैं.
मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले से ही आईपीएचएस-2022 के नियमों में तय संख्या से अधिक सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बारामूला शहर में 24.62 करोड़ रुपए की लागत वाली 14 विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है.
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एएमटी/एबीएम
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