पश्चिम बंगाल: देश-विरोधी गतिविधियों को रोकने की मांग को लेकर एबीवीपी की रैली के मद्देनजर बढ़ाई गई सुरक्षा

कोलकाता, 24 अगस्त . अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से जादवपुर यूनिवर्सिटी में ‘राष्ट्र-विरोधी वामपंथी गतिविधियों’ को खत्म करने के लिए Monday को होने वाली रैली के मद्देनजर Police की ओर से सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

यह रैली दक्षिण में ढाकुरिया क्रॉसिंग से शुरू होकर जादवपुर 8बी बस स्टैंड पर खत्म होगी. रैली के रास्ते में ही जादवपुर यूनिवर्सिटी का कैंपस पड़ता है. हालांकि एबीवीपी नेताओं का कहना है कि यह शांतिपूर्ण रैली सिर्फ रास्ते से गुजरेगी. कैंपस में घुसने की किसी तरह की कोशिश नहीं की जाएगी. इसके बाद भी कोलकाता Police की ओर से रैली को लेकर किसी भी तरह के तनाव से बचने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं.

बता दें कि पिछले हफ्ते एबीवीपी और सीपीआई(एम) के छात्र संगठन एसएफआई के कार्यकर्ताओं के बीच दो बार झड़प हुई थी. इस दौरान दोनों तरफ के कई छात्र घायल हो गए थे. जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से Monday को ही झड़पों की जांच के लिए बनाई गई जांच समिति के भविष्य को लेकर कोई घोषणा की जा सकती है. तीन सदस्यीय जांच समिति के भविष्य को लेकर अनिश्चितता तब पैदा हुई थी, जब समिति के प्रमुख और नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर, शुभा शंकर Government ने जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन को ईमेल भेजकर कहा कि वे इस जांच समिति का नेतृत्व करने के इच्छुक नहीं हैं.

Government के अलावा, समिति के अन्य सदस्यों में बाबासाहेब अंबेडकर एजुकेशन यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर अरुणाशीष गोस्वामी और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के डायरेक्टर सौमेंदु चट्टोपाध्याय शामिल थे. फिलहाल, जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास दो विकल्प हैं. पहला यह कि जांच समिति के प्रमुख के तौर पर शुभा शंकर Government की जगह किसी और को लाया जाए, और दूसरा विकल्प यह कि नए सदस्यों के साथ एक नया पैनल घोषित किया जाए.

सालों से, New Delhi में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की तरह ही, कोलकाता में जादवपुर यूनिवर्सिटी भी वामपंथी छात्र संगठनों का मजबूत गढ़ रहा है. यहां तक ​​कि 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली Government के 15 सालों के दौरान भी, जादवपुर यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों पर कब्जा करने की तृणमूल कांग्रेस की सभी कोशिशें नाकाम रहीं.

एसडी/पीएम