पश्चिम बंगाल: डेंगू के मामलों को लेकर पांच संवेदनशील जिलों की पहचान, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता

कोलकाता, 31 अगस्त . पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील पांच जिलों की पहचान की गई है. अधिकारियों ने Monday को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के पांच जिलों की पहचान डेंगू के सबसे ज्यादा जोखिम वाले जिलों के तौर पर की है.

लगातार मौसम के बदलने और बारिश की वजह से राज्य के स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है. कुछ जिलों में डेंगू के मामले और उससे होने वाली मौतों के मामले बढ़े हैं. पिछले महीने और मौजूदा मॉनसून के दौरान डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को देखते हुए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पांच जिलों की पहचान डेंगू के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाकों के तौर पर की है.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजधानी कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद की संवेदनशील इलाकों के तौर पर पहचान की गई है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “डेंगू के अलावा, इन जिलों से ‘प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम’ के मामले भी सामने आए हैं. यह मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप है जो किडनी पर बुरा असर डाल सकता है.”

इस बीच, Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और डॉक्टरों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को सही-सही बताएं, न कि उसे छिपाएं या कम करके दिखाएं. पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस Government के दौरान ऐसी शिकायतें आम थीं.

Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. डेंगू या मलेरिया के मामलों को ‘अज्ञात बुखार’ बताने की कोई जरूरत नहीं है. पिछली राज्य Government हमेशा प्रभावित लोगों या मरने वालों की संख्या कम करके बताती थी, और अस्पतालों के अधिकारियों व डॉक्टरों को डेंगू के मामलों को ‘अज्ञात बुखार’ के तौर पर रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था. लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं. छिपाने के लिए क्या है? अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा. डॉक्टरों के डेंगू लिखने से डरने की कोई वजह नहीं है. अगर डेंगू है, तो वे डेंगू लिखेंगे. अगर नहीं है, तो वे नहीं लिखेंगे.”

एसडी/पीएम