
पटियाला, 2 अक्टूबर . पंजाब में आयोजित 81वीं एनएटीकॉन कॉन्फ्रेंस 2026 में टीबी की रोकथाम, शीघ्र पहचान और इलाज को मजबूत करने पर मंथन किया गया. इस दौरान पंजाब के Governor गुलाब चंद कटारिया ने विद्वानों को सुझाव दिया कि टीबी के प्रति जागरूकता के लिए स्थानीय भाषा में छोटी-छोटी बुकलेट तैयार की जाएं, ताकि गांव के आम व्यक्ति तक भी इसकी जानकारी आसानी से पहुंच सके.
पंजाब के Governor गुलाब चंद कटारिया ने कहा, ये हमारा सौभाग्य है कि देश के टीबी (तपेदिक) मरीजों के लिए संगठन 1939 में स्थापित हुआ. हमारे यहां 81वीं एनएटीकॉन कॉन्फ्रेंस हो रही है. इसमें इस बीमारी से संबंधित देशभर के जितने प्रोफेसर और विद्वान मौजूद हुए. मंच पर भी वो लोग हैं, जिन्होंने इस संगठन को अपनी मेहनत से जिंदा रखा.
उन्होंने कहा कि इस बीमारी को लेकर आज के समय में कम से कम इतना विश्वास है कि समय पर अगर व्यक्ति में इसकी पहचान हो जाए, तो Government की तरफ से सभी तरह की सुविधाएं हैं. देश ने इसका लाभ उठाया है. 2015 से लेकर अब तक India में रोगियों की संख्या में 21 फीसदी की कमी आई है. टीबी से होने वाली मौतों की दरों में 28 फीसदी की कमी आई है.
पंजाब के Governor गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि इस बीमारी का इलाज हो सकता है. इन विद्वानों से जो सुझाव मिलेंगे, Government उसका इस्तेमाल करेगी. मैंने भी एक सुझाव दिया है कि आप सब स्थानीय भाषा में इससे संबंधित छोटी-छोटी बुकलेट बनाएं, ताकि गांव का व्यक्ति भी एक बार में उसे बैठकर पढ़ ले. इससे लोगों को टीबी के बारे में शुरुआती जानकारी हो जाएगी. उससे बचने के रास्ते भी लोगों के ध्यान में आएंगे.
उन्होंने कहा कि हमारा घर संवैधानिक है, जो भी चाहे वो कह सकता है. हमें जो अधिकार प्राप्त है, उसका इस्तेमाल करते हुए उसके प्रभाव को कम करने के लिए हम जो कर सकते हैं, वो करेंगे लेकिन कोई अगर ये कहे कि हमारे पास शिकायत ही न आए, ऐसा नहीं हो सकता है.
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