पंजाब में हिरासत में मारपीट के आरोपों पर एनएचआरसी सख्त, मुख्य सचिव और डीजीपी से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

New Delhi, 5 सितंबर . पंजाब में हिरासत में मारपीट और यातना के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने राज्यसभा सांसद तरुण चुघ द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लिया है, जिसमें पंजाब Police कर्मियों पर एक पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों के साथ हिरासत में मारपीट, यातना और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया गया है.

शिकायत के अनुसार, पीड़ित सुनाम के गांव शेरों में Chief Minister भगवंत मान के “लोक मिलनी” कार्यक्रम के दौरान पंजाब में नशे के मुद्दे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के तौर पर काला झंडा दिखा रहा था. इसके बाद उसे कथित तौर पर Police हिरासत में ले लिया गया.

मामले पर आयोग के माननीय सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने विचार किया. पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव, डीजीपी, एसपी संगरूर और जिलाधिकारी संगरूर को तत्काल जांच करने और दो सप्ताह के भीतर बिंदुवार एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

पीठ ने पीड़ित का तत्काल मेडिको-लीगल परीक्षण कराने, संबंधित Police परिसर के cctv फुटेज को पूरी तरह और बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित रखने और उसकी प्रमाणित कॉपी पेन ड्राइव में जमा करने का निर्देश दिया है.

अधिकारियों को First Information Report और हिरासत के रिकॉर्ड, हिरासत/पूछताछ से जुड़े सभी Police कर्मियों का विवरण और पीड़ित के परिवार के सदस्यों से संबंधित आरोपों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया है.

आयोग ने आगे निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड, cctv फुटेज, Police रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य भौतिक साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित और संरक्षित किया जाए.

डीएससी