
जालंधर, 6 नवंबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने पूर्व पंजाब उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में पंजाब और चंडीगढ़ में 14 स्थानों पर छापेमारी की है.
ईडी के जालंधर जोनल कार्यालय ने 2 और 3 नवंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया.
ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी कागजात, पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) के प्लॉटों से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण बरामद किए गए. साथ ही कुछ बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं.
एजेंसी ने बताया कि जिन स्थानों पर तलाशी ली गई, उनमें होशियारपुर में सुंदर शाम अरोड़ा का आवास, शिवम अस्पताल तथा चंडीगढ़ और मोहाली में स्थित एसआरजी बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी, गुलमोहर टाउनशिप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उनसे जुड़े प्रमोटरों, निदेशकों एवं सहयोगियों के ठिकाने शामिल हैं.
ईडी की जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू हुई थी. इस First Information Report में सुंदर शाम अरोड़ा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं.
ईडी के मुताबिक, अरोड़ा ने अपने खिलाफ लंबित जांच को निपटाने के लिए विजिलेंस ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी को 1 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की पेशकश की थी. उन्हें 15 अक्टूबर 2022 को जीरकपुर में 50 लाख रुपए नकद अग्रिम राशि देते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था.
जांच में यह भी सामने आया है कि मार्च 2017 से सितंबर 2021 तक पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री रहते हुए सुंदर शाम अरोड़ा का पीएसआईईसी के कामकाज पर सीधा नियंत्रण था.
ईडी का आरोप है कि इस दौरान उन्होंने निजी रियल एस्टेट कंपनियों को पीएसआईईसी के मूल्यवान औद्योगिक प्लॉटों के हस्तांतरण में अनुचित लाभ पहुंचाया. इसके बदले उन्होंने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के नाम पर रियल एस्टेट कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की.
जांच एजेंसी के अनुसार, मोहाली के फेज-8 स्थित औद्योगिक प्लॉट संख्या ए-32, जो मूल रूप से पीएसआईईसी द्वारा जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स को आवंटित किया गया था, फरवरी 2020 में एआरसीआईएल द्वारा आयोजित नीलामी के माध्यम से जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी को 90.56 करोड़ रुपए में हस्तांतरित किया गया.
ईडी ने कहा कि लीज डीड की शर्तों के अनुसार पीएसआईईसी को बिक्री मूल्य का 50 प्रतिशत हिस्सा, बढ़ी हुई भूमि लागत और ट्रांसफर शुल्क मिलना चाहिए था, लेकिन यह राशि पूरी तरह जमा नहीं की गई.
एजेंसी के अनुसार, अगस्त 2021 में पीएसआईईसी, एआरसीआईएल और जीआरजी के बीच त्रिपक्षीय समझौता रद्द होने के बाद भी न तो लीज रद्द करने और न ही प्लॉट वापस लेने की कोई कार्रवाई की गई.
ईडी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने बाद में बकाया राशि और शुल्क की गणना से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी थी और वह इस प्लॉट से जुड़े मामलों में सीधे तौर पर शामिल थे.
जांच में प्राप्त बैंक रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि सुंदर शाम अरोड़ा ने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के माध्यम से इस प्लॉट की खरीद में निवेश किया था.
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एएमटी/
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