पंजाब: ‘आप’ ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपियों को सजा देने की मांग की

चंडीगढ़, 19 अक्टूबर . आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने Monday को Prime Minister Narendra Modi से अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने का आग्रह किया.

‘आप’ ने कहा कि भाजपा राम मंदिर से जुड़ी भावनाओं का फायदा उठाकर सत्ता में आई है, उसे भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात करने वालों को संरक्षण नहीं देना चाहिए.

अमन अरोड़ा ने चढ़ावा चोरी की 105 घटनाओं का हवाला देते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की मांग की और सवाल उठाया कि जवाबदेही केवल कनिष्ठ कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित होनी चाहिए.

अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के एक लाख से अधिक राम भक्तों ने Prime Minister मोदी को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है और लिखा है, “राम भक्तों की एक पुकार, चंदा चोरों को सजा इस बार.”

अरोड़ा ने कहा, “लाखों राम भक्तों ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में अटूट आस्था और भक्ति के साथ अपनी मेहनत की कमाई दान की. यदि भक्तों द्वारा दान की गई धनराशि का दुरुपयोग हुआ है, तो यह उनकी आस्था के साथ विश्वासघात है. Prime Minister Narendra Modi को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा मिले.”

‘आप’ पंजाब अध्यक्ष ने कहा, “मैं यह मुद्दा ‘आप’ नेता या पार्टी अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि एक राम भक्त के रूप में उठा रहा हूं, जो पंजाब भर के लाखों लोगों के दर्द को समझता है. देशभर के लोगों ने श्रीराम मंदिर के निर्माण का अपार हर्षोल्लास के साथ जश्न मनाया और इस पवित्र परियोजना में अपनी मेहनत की बचत से उदारतापूर्वक दान दिया. उनकी आस्था और योगदान सम्मान के पात्र हैं.”

पंजाब के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त पत्रों के बंडलों को प्रदर्शित करते हुए कैबिनेट मंत्री पंजाब आप अध्यक्ष ने कहा, “पंजाब के एक लाख से अधिक राम भक्तों ने स्वेच्छा से Prime Minister मोदी को पत्र लिखकर उनसे हस्तक्षेप करने और न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. ये पत्र राज्य के लगभग 22,000 मतदान केंद्रों से आए हैं. हम इन्हें Prime Minister को भक्तों की सामूहिक अपील के रूप में प्रस्तुत करेंगे, जो जवाबदेही और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं.”

उन्होंने कहा, “जब वरिष्ठ अधिकारियों और मंदिर के कामकाज का जिम्मा संभालने वालों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो जवाबदेही निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित होनी चाहिए? यदि चोरी की बार-बार घटनाएं हुई हैं, तो संस्था की देखरेख करने वालों की जिम्मेदारी की भी जांच होनी चाहिए.”

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एएसएच/